

कोलकाता : लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन अनशन का मुद्दा शुक्रवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में गूंजा। कालीघाट तृणमूल के विधायकों ने पहले सदन में ‘पॉइंट ऑफ ऑर्डर’ के तहत इस विषय पर चर्चा कराने की मांग की, लेकिन स्पीकर ने इसकी अनुमति नहीं दी। इसके विरोध में विधायक सदन से निकल कर विधानसभा परिसर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष धरने पर बैठ गए।
धरने में पार्टी नेता कुणाल घोष, शोभनदेव चट्टोपाध्याय सहित कई विधायक शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर सोनम वांगचुक की मांगों की लगातार अनदेखी करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण आंदोलन और संवाद का सम्मान होना चाहिए, लेकिन केंद्र सरकार लद्दाख के लोगों की भावनाओं और वांगचुक की मांगों के प्रति उदासीन बनी हुई है।
कुणाल घोष ने कहा कि यदि सोनम वांगचुक को कुछ भी होता है, तो इसकी नैतिक जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी। वहीं, शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने कहा कि केंद्र सरकार को वांगचुक की लोकतांत्रिक मांगों पर तत्काल सकारात्मक पहल करनी चाहिए और बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता की आवाज को दबाने के बजाय लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से समाधान तलाशना सरकार की जिम्मेदारी है।
धरने के दौरान विधायकों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और सोनम वांगचुक के आंदोलन के प्रति एकजुटता जताते हुए उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई की मांग की।