संविधान की भावना कमजोर करने वाला कदम : ममता

राज्यपाल बोस के इस्तीफे पर मुख्यमंत्री ने की केंद्र की निंदा
फाइल फोटो
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कोलकाता : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस के 'अचानक' इस्तीफे की खबर पर गहरी चिंता और आश्चर्य व्यक्त किया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि इस समय उन्हें राज्यपाल के इस्तीफे के पीछे की वास्तविक वजहों की जानकारी नहीं है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए यह आश्चर्यजनक नहीं होगा यदि राज्यपाल पर आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कुछ राजनीतिक हितों की पूर्ति के लिए केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा दबाव डाला गया हो। ममता ने यह भी आरोप लगाया कि “केंद्रीय गृह मंत्री ने मुझे अभी सूचित किया कि आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया जा रहा है। इस संबंध में स्थापित शिष्टाचार के अनुसार मुझसे कोई परामर्श नहीं किया गया।”

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के एकतरफा कदम भारतीय संविधान की भावना के खिलाफ हैं और संघीय ढांचे की नींव को कमजोर करते हैं। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि केंद्र को सहयोगात्मक संघवाद के सिद्धांतों का सम्मान करना चाहिए और ऐसे निर्णय लेने से बचना चाहिए जो लोकतांत्रिक शिष्टाचार और राज्यों की गरिमा को क्षति पहुँचाते हों।

ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार लोकतंत्र और संविधान के मूल्यों की रक्षा के लिए सतर्क रहेगी और किसी भी प्रकार के दबाव या अनुचित हस्तक्षेप के खिलाफ संघर्ष करेगी। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले ऐसे एकतरफा निर्णयों से राज्य और उसके नागरिकों के अधिकारों पर असर पड़ सकता है।

राज्यपाल के इस्तीफे और नए नियुक्त राज्यपाल की प्रक्रिया को लेकर मुख्यमंत्री का यह बयान राज्य और केंद्र के बीच संवैधानिक और राजनीतिक संबंधों में उठ रहे तनाव को दर्शाता है। इस बीच, ममता बनर्जी ने यह भी संकेत दिया कि वे राज्य और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं और आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगी।

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