

कोलकाता : करीबी सहयोगी चंद्रिमा भट्टाचार्य के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने के कुछ ही घंटे बाद तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने शनिवार को फेसबुक लाइव के माध्यम से बागी नेताओं, भाजपा और चुनाव आयोग पर एक साथ तीखा हमला बोला। उन्होंने बागी नेताओं को "गद्दार" करार देते हुए आरोप लगाया कि वे भाजपा के इशारे पर काम कर रहे हैं और पार्टी को कमजोर करने की साजिश में शामिल हैं।
'पार्टी का चुनाव चिह्न मैंने दिया था'
ममता ने सवाल उठाया कि 2026 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल के टिकट पर जीतकर विधानसभा पहुंचे नेता आखिर दो महीने के भीतर ही पार्टी विरोधी कैसे हो गए। उन्होंने कहा, "पार्टी का चुनाव चिह्न मैंने दिया था और आपके नामांकन पत्रों पर मेरे हस्ताक्षर थे। याद रखिए, मैं अभी जिंदा हूं।" उन्होंने दावा किया कि तृणमूल का चुनाव चिह्न कोई नहीं छीन सकता और पार्टी की वैधता को चुनौती देने की हर कोशिश विफल होगी।
हर हाल में होगा शहीद दिवस समारोह
21 जुलाई को प्रस्तावित शहीद दिवस समारोह को लेकर भी ममता ने स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस अनुमति दे या नहीं, कार्यक्रम हर हाल में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा, "जरूरत पड़ी तो मैं रिक्शे पर खड़े होकर भी सभा करूंगी।" संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से उन्होंने मदन मित्रा और कुणाल घोष को पार्टी का नया महासचिव नियुक्त करने की भी घोषणा की।
भाजपा पर हमला
भाजपा पर निशाना साधते हुए ममता ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव में वोटों की "लूट" हुई और अब तृणमूल कार्यकर्ताओं के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कर भय का माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा केंद्रीय एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है।
CM शुभेंदु को बधाई के साथ चेतावनी
बिना नाम लिए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा, "अत्याचार मत कीजिए, हर एक्शन का रिएक्शन होता है।" हालांकि, पहली बार उन्होंने शुभेंदु को बधाई भी दी और कहा कि वह लंबे समय तक तृणमूल में रहे तथा उन्हें पार्टी और सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि जो नेता भाजपा के साथ चले गए, उन्हें संरक्षण मिल रहा है, जबकि जो तृणमूल में बने हुए हैं, उनके खिलाफ सीबीआई सहित केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
ममता के इस संबोधन को पार्टी के भीतर जारी सत्ता संघर्ष के बीच कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने और बागी खेमे पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।