'नेताजी जीवित होते तो क्या उन्हें भी बुलाते?'

नेताजी जयंती पर ममता बनर्जी का केंद्र पर वार
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी
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कोलकाता : नेताजी सुभाषचंद्र बोस की 129वीं जयंती पर आयोजित राज्य सरकार के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR मुद्दे पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। धर्मतला में आयोजित समारोह से उन्होंने सवाल किया कि अगर नेताजी आज जीवित होते, तो क्या उन्हें भी सुनवाई के लिए बुलाया जाता? उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि नेताजी के परिवार के सदस्य चंद्रकुमार बोस को पहले ही नोटिस भेजी जा चुकी है।

शुक्रवार को रेड रोड स्थित नेताजी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि SIR के कारण भय का माहौल बन गया है और अब तक लगभग 110 लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि रोज तीन-चार लोग डर के कारण आत्महत्या कर रहे हैं। सीएम ममता ने कहा, 'इसकी जिम्मेदारी केंद्र सरकार को लेनी होगी। चुनाव आयोग के खिलाफ मामला क्यों नहीं होगा?'

नेताजी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, नेताजी ने योजना आयोग गठन किया था, जिसे जानबूझकर हटा दिया गया और उसकी जगह नीति आयोग बना दिया गया। वह क्या करता है, किसी को ठीक से पता नहीं। मुख्यमंत्री ने देश के इतिहास से छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए कहा कि महान व्यक्तियों और भाषाओं का अपमान किया जा रहा है।

उन्होंने मौजूदा हालात को “मानवता बनाम दानवता की लड़ाई” करार देते हुए नेताजी के नारे का उल्लेख करते हुए “दिल्ली चलो” का आह्वान किया। उन्होंने SIR की नोटिस को आम लोगों के लिए “यातना” बताते हुए व्यापक आंदोलन की चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “जो लोग आज दूसरों को यातना दे रहे हैं, उन्हें भी एक दिन वही यातना झेलनी पड़ेगी।”

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