

15 प्रतिनिधियों के साथ ज्ञानेश कुमार से करेंगी मुलाकात
केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों से पहले चुनाव आयोग और तृणमूल कांग्रेस के बीच टकराव के संकेत तेज हो गए हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 2 फरवरी को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात करेंगी। इस बैठक में चुनावी प्रक्रिया, प्रशासनिक निष्पक्षता और विपक्ष को कथित रूप से दबाने के आरोपों समेत कई गंभीर मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। आयोग ने ममता बनर्जी को शाम 4 बजे का समय दिया है और उनके साथ 15 प्रतिनिधियों को बैठक में शामिल होने की अनुमति दी गई है। यह बैठक दिल्ली में होगी।
“मुंह पर ताला” लगाने के आरोप, नाम हटाने का विवाद
ममता बनर्जी पहले भी आरोप लगा चुकी हैं कि कुछ मामलों में नाम हटाने या प्रक्रियाओं पर सवाल उठाने पर “मुंह पर ताला लगाने” जैसा रवैया अपनाया गया। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सवाल उठाने वालों की आवाज दबाई जा रही है, जिसे लेकर वे सीधे चुनाव आयोग के सामने अपनी बात रखेंगी।
SIR प्रक्रिया और कथित उत्पीड़न का मुद्दा
तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि राज्य में SIR प्रक्रिया के नाम पर आम लोगों को परेशान किया जा रहा है। ममता बनर्जी का कहना है कि सत्यापन और जांच की प्रक्रिया का दुरुपयोग कर राजनीतिक विरोधियों और आम नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है। यह मुद्दा बैठक में प्रमुख रूप से उठाया जाएगा।
केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप
ममता बनर्जी ने एनआईए जैसी केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि चुनाव से पहले भय का माहौल बनाने के लिए एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस विषय पर भी आयोग से स्पष्ट जवाब और कार्रवाई की मांग की जाएगी।
माइक्रो ऑब्जर्वरों और ट्रेनिंग पर सवाल
मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया है कि कई जगहों पर माइक्रो ऑब्जर्वरों को पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। उनका कहना है कि बिना ट्रेनिंग के नियुक्तियां चुनावी पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती हैं और इससे निष्पक्ष चुनाव प्रभावित हो सकता है।
वॉट्सऐप से निर्देश भेजने पर आपत्ति
तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव से जुड़ी अहम गाइडलाइंस और निर्देश सीईओ कार्यालय से वॉट्सऐप के जरिये भेजे जा रहे हैं, जो एक औपचारिक और पारदर्शी प्रक्रिया नहीं मानी जा सकती। इस मुद्दे पर भी आयोग से स्पष्ट नीति तय करने की मांग की जाएगी।
विपक्ष की आवाज़ दबाने की साजिश का आरोप
तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि चुनाव से पहले विपक्षी दलों की आवाज दबाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं और कार्रवाई की जा रही है। ममता बनर्जी इस पूरे मुद्दे को “लोकतंत्र पर हमला” बताते हुए आयोग के सामने रखेंगी।
बैठक के नतीजों पर टिकी निगाहें
अब सभी की निगाहें 2 फरवरी की इस अहम बैठक पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि इस बातचीत के नतीजे से यह साफ होगा कि चुनाव आयोग और राज्य सरकार के बीच मतभेद किस दिशा में जाते हैं और आगामी चुनावी प्रक्रिया पर इसका क्या असर पड़ेगा।