

कोलकाता : बारुईपुर के सूर्यपुर में नाबालिग से कथित दुष्कर्म और हत्या की घटना अब राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गई है। इसी मुद्दे को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी सोमवार की शाम एक बार फिर सड़क पर उतरीं।
कालीघाट स्थित अपने आवास से निकले कैंडल मार्च को केंद्रीय बलों ने गली के मुहाने पर बैरिकेड लगाकर रोकने की कोशिश की, लेकिन ममता बनर्जी अपने समर्थकों के साथ बैरिकेड तोड़कर हरीश चटर्जी स्ट्रीट, कालीघाट रोड और हाजरा मोड़ तक पहुंचीं। पूरे मार्च के दौरान "वी वांट जस्टिस" और "जस्टिस फॉर बारुईपुर" के नारे गूंजते रहे।
व्यस्त समय में हाजरा मोड़ पर यातायात भी प्रभावित हुआ। मार्च में सांसद डोला सेन, प्रतिमा मंडल और अपरूपा पोद्दार समेत कई महिला नेता शामिल रहीं, जबकि पुलिस और केंद्रीय बलों की भारी तैनाती रही। रविवार की घटना के बाद बारुईपुर में तनाव बना हुआ है। इसी बीच, ममता के कालीघाट स्थित आवास के बाहर केंद्रीय बलों और पुलिस की अतिरिक्त तैनाती को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया।
तृणमूल ने आरोप लगाया कि उन्हें बारुईपुर जाने से रोकने के लिए "हाउस अरेस्ट" जैसी स्थिति बनाने की कोशिश की गई। फेसबुक लाइव के जरिए ममता ने दावा किया कि वह पीड़ित परिवार से मिलना चाहती थीं, लेकिन सुरक्षा घेराबंदी के कारण ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने दोषियों को कठोरतम सजा देने की मांग करते हुए कहा कि यह घटना पूरे राज्य को झकझोरने वाली है।
सोमवार को उनके निर्देश पर सांसद डोला सेन, प्रतिमा मंडल और बिमान बंद्योपाध्याय का तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मिला। इसके बाद ममता ने डोला सेन के फोन से पीड़ित परिवार से बात की। प्रतिनिधिमंडल की रिपोर्ट मिलने के बाद उन्होंने वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की और स्वयं कैंडल मार्च का नेतृत्व किया।
मार्च शुरू होने से पहले तृणमूल ने भाजपा और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पीड़ित परिवार के साथ खड़े होने के बजाय सरकार राजनीतिक कार्यक्रमों में व्यस्त रही। इस घटनाक्रम ने बारुईपुर कांड को लेकर राज्य की सियासत को और गर्म कर दिया है।