हॉर्मुज पर अमेरिका का बड़ा कदम, ईरान के खिलाफ नाकेबंदी का ऐलान

इस्लामाबाद वार्ता विफल होने के बाद कार्रवाई; वैश्विक शिपिंग और बाजारों पर असर के संकेत
हॉर्मुज पर अमेरिका का बड़ा कदम, ईरान के खिलाफ नाकेबंदी का ऐलान
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वॉशिंगटन/इस्लामाबाद : United States ने Iran के खिलाफ बड़ा समुद्री कदम उठाते हुए हॉर्मुज जलडमरूमध्य में आने-जाने वाले जहाजों की नाकेबंदी का ऐलान किया है। Donald Trump ने कहा कि इस्लामाबाद में हुई उच्चस्तरीय वार्ता विफल रहने के बाद अमेरिकी नौसेना यह कदम उठाएगी।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, सोमवार सुबह 10 बजे (ईडीटी) से ईरान के सभी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू की जाएगी। हालांकि, गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच जाने वाले जहाजों को Strait of Hormuz से गुजरने की अनुमति दी जाएगी।

21 घंटे की बातचीत बेनतीजा

अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में करीब 21 घंटे तक आमने-सामने बातचीत हुई, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका। दो सप्ताह से जारी नाजुक युद्धविराम अब अनिश्चितता में पड़ गया है।

एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, यह कदम ईरान पर दबाव बनाने और उसकी “सीमित क्षमता” दिखाने के लिए उठाया गया है। सात सप्ताह से जारी संघर्ष में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है और वैश्विक बाजार प्रभावित हुए हैं।

शिपिंग पर तत्काल असर

ट्रंप के ऐलान के बाद हॉर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग गतिविधियां तुरंत प्रभावित हुईं। रिपोर्ट के मुताबिक, कई जहाजों ने अपना रास्ता बदल लिया और कुछ वापस लौट गए।

ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि जलडमरूमध्य पर उसका “पूरा नियंत्रण” है और किसी भी सैन्य जहाज को “कड़ा जवाब” दिया जाएगा। हालांकि, उसने कहा कि गैर-सैन्य जहाजों के लिए रास्ता खुला रहेगा।

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने आरोप लगाया कि वार्ता के दौरान अमेरिका ने “अचानक शर्तें बदल दीं” और नाकेबंदी का रास्ता अपनाया।

वहीं, ईरानी संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Qalibaf ने ट्रंप की धमकियों को खारिज करते हुए कहा कि इसका ईरान की जनता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

अमेरिका की सख्त शर्तें

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की प्रमुख शर्तों में ईरान का परमाणु कार्यक्रम खत्म करना, यूरेनियम संवर्धन रोकना, प्रमुख परमाणु सुविधाओं को बंद करना और क्षेत्रीय संगठनों को समर्थन समाप्त करना शामिल है।

ब्रिटेन की भूमिका पर सस्पेंस

ट्रंप ने दावा किया कि United Kingdom भी इस क्षेत्र में माइंसवीपर भेजेगा, हालांकि ब्रिटेन ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है।

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