

कोलकाता : गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत ने अपने एक महान आचार्य को खो दिया। प्रख्यात शास्त्रीय गायक, संगीत चिंतक और गुरु अमियरंजन बंद्योपाध्याय का बुधवार दोपहर 2:30 बजे मैसिव कार्डियक अरेस्ट के कारण 100 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
हाल ही में कमर की हड्डी टूटने के बाद उन्हें एसएसकेएम अस्पताल के वुडबर्न वार्ड में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान उनकी हालत में सुधार होने पर कुछ दिन पहले उन्हें घर लाया गया, लेकिन दो दिन पूर्व तबीयत बिगड़ने पर उन्हें दक्षिण कोलकाता के एक निजी अस्पताल में भर्ती कर वेंटिलेटर पर रखा गया।
21 फरवरी 1927 को जन्मे अमियरंजन बंद्योपाध्याय ने अपने जीवन का प्रत्येक क्षण संगीत साधना को समर्पित किया। शतायु होने के बाद भी उन्होंने मंच पर 40 मिनट तक राग बिहाग प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। अंतिम समय तक वे अपने शिष्यों को संगीत की शिक्षा देते रहे और उन्हें शास्त्रीय संगीत की परंपरा से जोड़ते रहे।
उन्होंने संगीत के सौंदर्यशास्त्र पर शोध कर पीएचडी की उपाधि प्राप्त की तथा लंबे समय तक रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय में अध्यापन किया। विष्णुपुर घराने की शिक्षा उन्होंने अपने पिता सत्यकिंकर बंद्योपाध्याय से प्राप्त की, लेकिन परंपरा का सम्मान करते हुए भी संगीत में नवीन प्रयोगों को अपनाया।
उनका मानना था कि परिवर्तन को स्वीकार करना ही कला की जीवंतता का आधार है। कुछ दिन पहले तक उनके परिवार और शिष्यों को उम्मीद थी कि वे फिर मंच पर लौटेंगे लेकिन गुरु पूर्णिमा के दिन उनके निधन के साथ भारतीय शास्त्रीय संगीत का एक स्वर्णिम अध्याय इतिहास के पन्नों में दर्ज होकर रह गया।