मध्यमग्राम ट्रॉली हत्याकांड: माँ-बेटी को आजीवन कारावास

सोने और संपत्ति के लालच में चाची सास की निर्मम हत्या; 8 माह में न्याय, कोर्ट में थी कड़ी सुरक्षा
Madhyamgram trolley murder case: Mother and daughter sentenced to life imprisonment
अभियुक्त आरती घोष को कोर्ट ले जाती पुलिस
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निधि, सन्मार्ग संवाददाता

बारासात : पश्चिम बंगाल के मध्यमग्राम में हुए सनसनीखेज ट्रॉली हत्याकांड में दोषी पाई गईं माँ आरती घोष और बेटी फाल्गुनी घोष को आज, सोमवार को बारासात कोर्ट ने कठोर सज़ा सुनाई है। सप्तम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय की न्यायाधीश प्रज्ञागार्गी भट्टाचार्य (हुसैन) ने इस जघन्य अपराध के लिए दोनों दोषियों को आजीवन कारावास (Life Imprisonment) की सज़ा सुनाई। आजीवन कारावास के अतिरिक्त, कोर्ट ने दोनों दोषियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

हत्या का जघन्य मकसद और तरीका:

यह पूरा मामला इसी साल फरवरी का है, जिसने प्रदेश को स्तब्ध कर दिया था। माँ और बेटी ने सोने के गहनों और संपत्ति के लालच में अपनी चाची सास सुमिता घोष की निर्मम हत्या कर दी थी। हत्या के बाद, उन्होंने सबसे पहले सुमिता के गहने लूटे। शव को ठिकाने लगाने के लिए, उन्होंने अगले दिन कोलकाता जाकर एक ट्रॉली खरीदी

क्रूरता की हद पार करते हुए, उन्होंने शव को ट्रॉली में फिट करने के लिए हथौड़े से सुमिता के पैर तोड़े। 25 फरवरी को, वे इस ट्रॉली-बंद शव को कुम्हारटोली गंगा घाट पर फेंकने की कोशिश कर रहे थे, तभी स्थानीय लोगों के संदेह के आधार पर कोलकाता पुलिस ने उन्हें रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया था, जिससे इस भयावह हत्याकांड का पर्दाफाश हुआ।

Madhyamgram trolley murder case: Mother and daughter sentenced to life imprisonment
अभियुक्त फाल्गुनी घोष का फोटो

त्वरित जाँच और न्याय:

चूंकि हत्या मध्यमग्राम क्षेत्र में हुई थी, इसलिए मामले की जाँच की जिम्मेदारी मध्यमग्राम पुलिस को सौंपी गई थी। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त हथियार, ट्रॉली, और लूटे गए गहने बेचने वाली दुकान से जुड़े सभी महत्वपूर्ण सबूत जुटाए। पुलिस ने अदालत में कुल 32 गवाहों को पेश किया।

सरकारी वकील विभास चटर्जी ने बताया कि वह इस जघन्य मामले का त्वरित निपटारा चाहते थे, और कोर्ट ने महज आठ महीने के भीतर ही पूरी सुनवाई खत्म कर दी। अदालत ने बीते शुक्रवार को दोनों माँ-बेटी को दोषी करार दिया था।

आज जब न्यायाधीश ने सज़ा का ऐलान किया, तब बारासात कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। इस फैसले ने न केवल अपराध की गंभीरता को दर्शाया है, बल्कि न्यायपालिका द्वारा त्वरित न्याय सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया है।

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