'LG साहब का प्रमोशन हुआ और मेरा डिमोशन...', वंदे भारत की लॉन्चिंग पर बोले उमर अब्दुल्ला

PM मोदी से की ये मांग
'LG साहब का प्रमोशन हुआ और मेरा डिमोशन...', वंदे भारत की लॉन्चिंग पर बोले उमर अब्दुल्ला
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जम्मू - जम्मू-कश्मीर के लिए आज का दिन ऐतिहासिक रहा। पीएम मोदी ने श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा रेलवे स्टेशन से श्रीनगर के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई। इस बीच उनके साथ केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी मौजूद रहे। इस अवसर पर एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पीएम नरेंद्र मोदी का शुक्रिया अदा किया। इसके साथ ही जनता को संबोधित करते हुए उमर ने केंद्र शासित प्रदेश को राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग दोहराई। उन्होने विश्वास जताया कि पीएम मोदी इसे पूरा करेंगे। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री के अलावा केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह भी मौजूद थे।

'एलजी का प्रमोशन हुआ, मेरा डिमोशन'

जम्मू-कश्मीर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मेरा सौभाग्य रहा है कि जब भी रेलवे के लिए बड़े कार्यक्रम हुए हैं, मैं उसका हिस्सा रहा हूं। पहली बार अनंतनाग रेलवे स्टेशन का उद्घाटन हुआ, तब बनिहाल रेल सुरंग खोली गई थी उस समय भी मैं मौजूद था। कार्यक्रम के दौरान केंद्र शासित प्रदेशों में चीजें सामान्य होने की उम्मीद जताते हुए सीएम अब्दुल्ला ने कहा कि 2014 में जब कटरा रेलवे स्टेशन का उद्घाटन हुआ था, तब भी यही चार लोग मौजूद थे। मनोज सिन्हा उस समय रेलवे के लिए MoS (राज्य मंत्री) थे, उन्हें माता की कृपा से LG के पद पर प्रमोशन मिला। हालांकि, मेरा थोड़ा डिमोशन हुआ मैं एक राज्य के मुख्यमंत्री से केंद्रशासित प्रदेश का सीएम बना।

श्रीनगर के लिए ट्रेन हुई रवाना

पीएम मोदी ने आज कश्मीर तक वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई। ट्रेन चिनाब ब्रिज और अंजी खाद पुल से होकर श्रीनगर के लिए रवाना हुई। इससे पहले पीएम मोदी ने दुनिया के सबसे ऊंचे चिनाब ब्रिज और देश के पहले केबल स्टेड रेलवे पुल अंजी खाद पुल का भी उद्घाटन किया।

कश्मीर तक ट्रेन उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेलवे लिंक (USBRL) परियोजना का हिस्सा था, जो अब पूरा हो गया है। उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) परियोजना 272 किलोमीटर लंबी USBRL परियोजना है, जिसका निर्माण लगभग 43,780 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। इसमें 36 सुरंगें (119 किलोमीटर तक फैली हुई) और 943 पुल शामिल हैं। इस परियोजना का उद्देश्य देश को कश्मीर के साथ रेल मार्ग से जोड़ना था।

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