निधि, सन्मार्ग संवाददाता
बरा नगर: उत्तर 24 परगना जिले के बरानगर नगरपालिका के वार्ड नंबर 1 से होकर गुजरने वाली बागजोला नहर (Bagjola Canal) के हिस्से पर अवैध रूप से कब्जा करने का गंभीर आरोप भू-माफियाओं पर लगा है। इस मामले ने स्थानीय निवासियों और राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
गौरतलब है कि सांसद सौगत राय के कोष से इस नहर का जीर्णोद्धार (Remodeling) किया गया था। इस सुधार कार्य के बाद नहर के आसपास के निचले इलाकों को मानसून के दौरान होने वाले जलभराव (Waterlogging) से काफी हद तक राहत मिली थी, जिससे स्थानीय लोगों का जीवन आसान हुआ था।
लेकिन, अब आरोप है कि बरानगर नगरपालिका के वार्ड नंबर 1 के अंतर्गत आने वाले सतीन सेन नगर के पास, कुछ प्रभावशाली जमीन माफियाओं द्वारा 'पाइलिंग' (Piling) के नाम पर सुनियोजित तरीके से नहर के सार्वजनिक हिस्से पर अवैध रूप से कब्जा किया जा रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह अवैध निर्माण नहर के मूल स्वरूप को बिगाड़ रहा है और भविष्य में एक बार फिर जलभराव की समस्या पैदा कर सकता है।
इस गंभीर शिकायत की सूचना मिलते ही, शनिवार को स्थानीय विधायक सायंतिका बनर्जी स्थिति का निरीक्षण करने के लिए मौके पर पहुँचीं।
विधायक के घटनास्थल पर पहुँचते ही, इलाके के क्रोधित निवासियों ने उन्हें घेर लिया और अपनी समस्याओं एवं चिंताओं को उनके सामने खुलकर रखा। निवासियों ने जमीन माफियाओं के खिलाफ अपनी तीव्र नाराजगी व्यक्त की और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने विधायक से मांग की कि इस अवैध कब्जे को तुरंत रोका जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
निवासियों की शिकायतें सुनने और मौके पर स्थिति का जायजा लेने के बाद, विधायक सायंतिका बनर्जी ने उन्हें आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि समस्या का समाधान जल्द से जल्द किया जाएगा और बागजोला नहर के हिस्से पर किसी भी कीमत पर अवैध कब्जा नहीं होने दिया जाएगा। इस आश्वासन के साथ, उन्होंने स्थानीय प्रशासन को इस मामले में त्वरित और निर्णायक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता चंडीचरण राय ने इस घटना को लेकर राजनीतिक बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि "विधायक सब जानती हैं कि नहर पर कब्जा करने वाले कौन से लोग हैं। वह अपना हिस्सा लेने के लिए ही दल-बल के साथ बागजोला नहर देखने गई थीं।" बीजेपी ने विधायक के दौरे को केवल दिखावा बताया है और अवैध कब्जे में सत्तारूढ़ दल की मिलीभगत का आरोप लगाया है।
अब स्थानीय लोगों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि विधायक के आश्वासन के बाद अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ कितनी जल्दी और कितनी सख्त कार्रवाई की जाती है।