

तेहरान/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव और गंभीर हो गया है। अमेरिका द्वारा ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बड़े हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है।
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अनुसार, सोमवार को मिसाइलों और ड्रोन के जरिए कई अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया गया। ईरान ने दावा किया कि जॉर्डन के प्रिंस हसन एयरबेस पर ईंधन भंडार और मिसाइल डिपो को निशाना बनाया गया, जबकि बहरीन स्थित अमेरिकी ड्रोन कमांड सेंटर पर भी हमला किया गया।
ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अमेरिका ने हमले नहीं रोके तो क्षेत्र में मौजूद उसके सैन्य ठिकानों को और बड़े पैमाने पर निशाना बनाया जाएगा।
जॉर्डन ने कहा कि ईरान की ओर से दागी गई चार मिसाइलों को उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने मार गिराया। वहीं कुवैत ने भी दावा किया कि उसकी एयर डिफेंस यूनिट ने कई मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया। कुवैत के अनुसार, उत्तरी सीमा के तीन सुरक्षा ठिकानों को नुकसान पहुंचा है और एक ड्रोन हमले में कुवैत ऑयल कंपनी के ऑफशोर ड्रिलिंग प्लेटफॉर्म पर कार्यरत एक कर्मचारी घायल हुआ।
फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने पिछले तीन दिनों में 300 से अधिक ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इनमें से करीब 140 हमले केवल एक रात में किए गए। दूसरी ओर, ईरान ने भी अमेरिकी हितों और क्षेत्र में मौजूद सहयोगी देशों से जुड़े ठिकानों पर जवाबी हमले तेज कर दिए हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते इस सैन्य टकराव ने पूरे पश्चिम एशिया में तनाव को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर इसके असर को लेकर दुनिया की नजरें अब दोनों देशों की अगली रणनीति पर टिकी हैं।