केंद्र और कुकी-जो समूहों में हुआ समझौता

मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता बरकरार रहेगी, एनएच-2 को खोलने का फैसला
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कुकी-जो समुदाय के दो प्रमुख संगठनों ने केंद्र के साथ समझौते पर किये हस्ताक्षर
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नयी दिल्ली : कुकी-जो समुदाय के दो प्रमुख संगठनों ने गुरुवार को केंद्र सरकार के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं, जिसमें वे मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता को बनाये रखने, निर्दिष्ट शिविरों को संवेदनशील क्षेत्रों से स्थानांतरित करने और राज्य में दीर्घकालिक शांति एवं स्थिरता लाने के समाधान पर काम करने के लिए सहमत हुए हैं।

समझौते में नये सिरे से शर्तों को निर्धारित किया गया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगले सप्ताह संभावित मणिपुर यात्रा से पहले उठाये गये इस कदम में केंद्र द्वारा कुकी नेशनल ऑर्गेनाइजेशन (केएनओ) और यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट (यूपीएफ) के साथ त्रिपक्षीय ‘सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस’ (एसओओ) समझौते में नये सिरे से शर्तों को निर्धारित किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि इससे मणिपुर में शांति के प्रयासों पर सकारात्मक असर पड़ेगा।

राष्ट्रीय राजमार्ग-2 को खोलने का फैसला

कुकी-जो काउंसिल (केजेडसी) ने अलग से राष्ट्रीय राजमार्ग-2 को खोलने का फैसला किया है, जो मणिपुर से होकर गुजरता है। मोदी का मई, 2023 में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच भड़की जातीय हिंसा के बाद से राज्य का पहला दौरा होगा। गृह मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार पिछले कुछ दिन में मंत्रालय के अधिकारियों और कुकी समूहों के एक प्रतिनिधिमंडल के बीच कई बैठकों के बाद इस समझौते पर हस्ताक्षर किये गये। यूपीएफ के सात घटक और केएनओ के 16 घटक हैं।

मणिपुर में पिछले कुछ महीने से अपेक्षाकृत शांति

मणिपुर में बहुसंख्यक मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिये जाने की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में आदिवासी एकजुटता मार्च निकाले जाने के बाद तीन मई, 2023 को जातीय हिंसा शुरू हो गयी थी। तब से दोनों समुदायों के सदस्य सहित करीब 260 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं हालांकि पिछले कुछ महीने से मणिपुर में अपेक्षाकृत शांति है।

सात निर्दिष्ट शिविरों को स्थानांतरित करने पर भी सहमति

केएनओ और यूपीएफ ने सात निर्दिष्ट शिविरों को संवेदनशील क्षेत्रों से स्थानांतरित करने पर भी सहमति जतायी। उन्होंने शिविरों की संख्या कम करने, हथियारों को सीआरपीएफ तथा बीएसएफ के निकटवर्ती शिविरों में पहुंचाने पर भी रजामंदी जतायी। बयान के अनुसार एक संयुक्त निगरानी समूह अब से आधारभूत नियमों के प्रवर्तन पर कड़ी निगरानी रखेगा और भविष्य में उल्लंघनों से सख्ती से निपटा जायेगा, जिसमें एसओओ समझौते की समीक्षा भी शामिल है। मणिपुर में वर्तमान में राष्ट्रपति शासन लागू है।

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