कोलकाता में सैन्य शक्ति व सांस्कृतिक विविधता का प्रदर्शन

कोलकाता के ऐतिहासिक रेड रोड पर 77वें गणतंत्र दिवस की परेड आयोजित की गई।
कोलकाता में सैन्य शक्ति व सांस्कृतिक विविधता का प्रदर्शन
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कोलकाताः कोलकाता के ऐतिहासिक रेड रोड पर सोमवार को 77वे गणतंत्र दिवस की परेड आयोजित की गई, जिसमें सशस्त्र बलों ने देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए अपनी शक्ति और संकल्प का भव्य प्रदर्शन किया।

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने परेड की सलामी ली। भारतीय सेना की अग्रिम पंक्ति की पैदल सेना और तोपखाना इकाइयों के मार्चिंग दस्तों के साथ-साथ भारतीय नौसेना, भारतीय वायुसेना और सैन्य बैंड के दलों ने पेशेवर दक्षता, एकजुटता, गर्व और आपसी निष्ठा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी और राज्य मंत्रिमंडल के अन्य मंत्री समारोह में उपस्थित रहे। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सैकड़ों लोगों ने इस भव्य परेड को देखा। कोलकाता की गणतंत्र दिवस परेड ने भारतीय सेना की वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों से निपटने की परिचालन तैयारियों को पेश किया। इस परेड को राष्ट्रीय राजधानी के बाद भारत की सैन्य शक्ति के दूसरे सबसे बड़े प्रदर्शन के रूप में जाना जाता है।

परेड का नेतृत्व ब्रिगेडियर अजय कुमार दास ने किया

परेड की शुरुआत समारोह स्थल के ऊपर से गुजरते वायुसेना के चेतक हेलीकॉप्टरों द्वारा फूलों की वर्षा करने के साथ हुई। परेड का नेतृत्व ब्रिगेडियर अजय कुमार दास ने किया, जो बंगाल उप-क्षेत्र के डिप्टी जनरल ऑफिसर कमांडिंग और कोलकाता सैन्य स्टेशन के स्टेशन कमांडर हैं। कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण नवगठित छठी भैरव बटालियन की भागीदारी रही, जो भारतीय सेना के तेज, अधिक चुस्त और प्रौद्योगिकी-आधारित युद्धबल में रूपांतरण का प्रतीक है।

एक रक्षा अधिकारी के अनुसार, उच्च गति और जटिल युद्ध परिस्थितियों में संचालन के लिए तैयार यह बटालियन पारंपरिक पैदल सेना और विशेष बलों के बीच की खाई को पाटेगी। रेड रोड पर आयोजित परेड में स्वदेशी रूप से विकसित और उन्नत हथियार प्रणालियों को भी प्रदर्शित किया गया। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित अत्याधुनिक पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लांचर प्रणाली, अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर तोपें और विमान-रोधी तोपें सशस्त्र बलों की घातक मारक क्षमता का हिस्सा रहीं।

शहर और राज्य के अन्य हिस्सों के कई स्कूलों के बच्चों ने भी परेड में भाग लिया। इसके अलावा, आदिवासी नृत्य, सुंदरबन की बनबीबी-र-पाला और बाउल गीत जैसी लोक प्रस्तुतियों ने पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित किया और समारोह में मौजूद लोगों को आकर्षित किया।

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