7 शहरों में फ्लैट आकार वृद्धि में कोलकाता सबसे पीछे

दो वर्षों में राष्ट्रीय औसत 17% बढ़ा, कोलकाता में महज 2% वृद्धि
7 शहरों में फ्लैट आकार वृद्धि में कोलकाता सबसे पीछे
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सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : देश के शीर्ष सात शहरों में अपार्टमेंट के औसत आकार में पिछले दो वर्षों के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, लेकिन कोलकाता इस दौड़ में सबसे पीछे रहा। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में जहां शीर्ष-7 शहरों में औसत फ्लैट आकार 1,420 वर्गफुट था, वहीं 2025 में यह बढ़कर लगभग 1,656 वर्गफुट हो गया — यानी करीब 17% की वृद्धि।इसके विपरीत, कोलकाता में औसत अपार्टमेंट आकार में केवल 2% की वृद्धि हुई। वर्ष 2023 में यह 1,124 वर्गफुट था, जो 2024 में 1,149 वर्गफुट और 2025 में 1,151 वर्गफुट तक ही पहुंच पाया। इस तरह वृद्धि लगभग स्थिर रही। पुणे एकमात्र अन्य शहर रहा जहां एकल अंक की वृद्धि (5%) दर्ज की गई।

प्रीमियम घरों की मांग से बढ़ा आकार

रिपोर्ट जारी करने वाली रियल एस्टेट परामर्श संस्था Anarock Research के विश्लेषकों के अनुसार, अधिकांश बड़े शहरों में अपार्टमेंट आकार में तेज वृद्धि का कारण 1.5 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले प्रीमियम और लक्जरी घरों की बढ़ती हिस्सेदारी है। इन श्रेणियों में 3BHK और 4BHK जैसे बड़े कॉन्फिगरेशन सामान्य होते जा रहे हैं। कोलकाता में स्थिति अलग है। यहां अब भी एक करोड़ रुपये से कम बजट वाले घरों की मांग प्रमुख है। वर्ष 2025 में लॉन्च हुई 18,590 नई इकाइयों में से 64% से अधिक 80 लाख रुपये से कम मूल्य वर्ग में थीं। 2BHK फ्लैट अब भी खरीदारों की पहली पसंद बने हुए हैं, जिससे औसत आकार में बड़ी छलांग नहीं लग पा रही।

निवेशक बनाम अंतिम उपभोक्ता बाजार

विश्लेषकों का कहना है कि कोलकाता मुख्यतः एंड-यूजर आधारित बाजार है, जबकि बेंगलुरु जैसे शहरों में कोविड के बाद निवेशकों और एनआरआई खरीदारों की रुचि बढ़ी है। ऐसे खरीदार आधुनिक सुविधाओं और बड़े आकार वाले घरों को प्राथमिकता देते हैं। वहीं, हाइब्रिड वर्क मॉडल के कारण भी कई शहरों में बड़े घरों की मांग बढ़ी है। हालांकि 1,151 वर्गफुट का औसत आकार किफायती बाजार के संदर्भ में छोटा नहीं माना जाता। यह मुंबई महानगर क्षेत्र के 904 वर्गफुट के औसत से अधिक है और पुणे के 1,119 वर्गफुट के करीब है। अंतर केवल इतना है कि अन्य शहर तेजी से प्रीमियम श्रेणी की बड़ी इकाइयां जोड़ रहे हैं, जबकि कोलकाता का बाजार अब भी मध्यम और किफायती आवास पर केंद्रित है।

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