कोलकाता बुक फेयर : एक ऐसा स्टॉल जिसमें समाहित है 'इतिहास की खुशबू'

स्टॉल नंबर 545 में 222 साल पुरानी किताबें बढ़ा रहीं रोमांच, शुभाशीष ने समेट रखा है सौ सालों से अधिक पुरानी किताबों का खजाना
Kolkata Book Fair: A stall that encapsulates the 'fragrance of history'.
रेयर बुक स्टॉल में 222 साल पुरानी किताब को देखती एक पुस्तक प्रेमी
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निधि, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : अंतरराष्ट्रीय कोलकाता पुस्तक मेला इन दिनों अक्षर प्रेमियों के लिए कुंभ बना हुआ है। जहां एक ओर नयी किताबों की चमक और रंग-बिरंगे कवर पाठकों को लुभा रहे हैं, वहीं स्टॉल नंबर 545 (रेयर बुक स्टॉल) अपनी एक अलग ही आभा बिखेर रहा है। इस स्टॉल पर कदम रखते ही नयी स्याही की जगह 'इतिहास की खुशबू' आपका स्वागत करती है। इस अनूठे संग्रह के संचालक शुभाशीष भट्टाचार्य का मानना है कि पुरानी किताबें महज कागज का पुलिंदा नहीं, बल्कि अपने भीतर एक पूरा युग समेटे हुए होती हैं। उनके इस खजाने में अधिकांश किताबें 100 साल से अधिक पुरानी हैं, जो दुनिया के अलग-अलग कोनों से सफर तय कर यहां पहुंची हैं। शुभाशीष का कहना है कि उनके साथ सौ साल पुरानी किताबें उनके लिए बेशकीमती हैं। इन किताबों से लोगों को रूबरू करवाने के लिए वे इस मेले में शामिल हुए हैं।

222 साल पुराना रहस्य : जोआना साउथकोट की गाथा

स्टॉल का सबसे बड़ा आकर्षण है वर्ष 1804 में छपी पुस्तक 'द ट्रू एक्सप्लानेशन ऑफ द बाइबल'। करीब 222 साल पुरानी इस किताब की बाइंडिंग भले ही समय की मार से ढीली हो गई हो, लेकिन इसके भीतर दर्ज शब्द आज भी रोंगटे खड़े कर देते हैं। यह पुस्तक जोआना साउथकोट नामक एक ब्रिटिश महिला की भविष्यवाणियों और दैवीय संदेशों का संग्रह है। जोआना, जो एक साधारण किसान परिवार से थीं, ने दावा किया था कि ईश्वर उनसे सीधे संवाद करते हैं। 64 वर्ष की आयु में क्रिसमस के अगले दिन उनकी मृत्यु हो गई। शुभाशीष बताते हैं कि जोआना अपने पीछे एक रहस्यमय संदूक छोड़ गई थीं, जिसे केवल राष्ट्रीय संकट के समय 24 बिशपों की मौजूदगी में खोला जाना था। आज भी वह संदूक एक पहेली बना हुआ है। 392 पन्नों की यह दुर्लभ कवितामय पुस्तक और रेवरेण्ड मिस्टर पोमेरॉय के साथ उनका पत्राचार, मेले में आने वाले दर्शकों को अचंभित कर रहा है। इतिहास के झरोखे से रूबरू कराता यह स्टॉल साबित करता है कि डिजिटल दौर में भी दुर्लभ पन्नों की अहमियत कम नहीं हुई है।

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