

तिरुवनंतपुरम। केरल में तीन महिला शिक्षकों की कथित तौर पर मादक पदार्थ तस्करी मामले में गिरफ्तारी ने केवल कानून-व्यवस्था ही नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और समाज के सामने भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन शिक्षकों पर बच्चों को सही राह दिखाने की जिम्मेदारी होती है, उन्हीं पर नशीले पदार्थों के नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप लगने से अभिभावकों, छात्रों और शिक्षा जगत में चिंता बढ़ गई है। समग्र शिक्षा केरल (एसएसके) के तहत पेराम्बरा ब्लॉक रिसोर्स सेंटर में कार्यरत शिक्षिकाओं कीर्तना, काव्या और नीश्मा को एमडीएमए तस्करी गिरोह से कथित संबंधों के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस जांच में सामने आया कि मामला एक ऐसे नेटवर्क से जुड़ा है, जिसमें ऑनलाइन भुगतान और गुप्त तरीके से मादक पदार्थ पहुंचाने की व्यवस्था अपनाई जा रही थी।
शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पढ़ाने वाले व्यक्ति नहीं होते, बल्कि वे बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में किसी शिक्षक का नाम नशीले पदार्थों से जुड़े मामले में सामने आना स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में विश्वास के माहौल को प्रभावित करता है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं इस बात की जरूरत को रेखांकित करती हैं कि शिक्षकों और कर्मचारियों की समय-समय पर निगरानी, परामर्श और जागरूकता कार्यक्रमों को मजबूत किया जाए। साथ ही, युवाओं को मादक पदार्थों के खतरे से बचाने के लिए स्कूल स्तर पर भी प्रभावी अभियान चलाने की आवश्यकता है।
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने घटना को गंभीर और चौंकाने वाला बताते हुए कहा कि इससे राज्य में फैले मादक पदार्थ नेटवर्क की गहराई का पता चलता है। गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने भी शिक्षकों की कथित संलिप्तता पर हैरानी जताते हुए कहा कि जांच एजेंसियां आपूर्ति के स्रोत तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं। पुलिस के अनुसार, एक व्यक्ति से एमडीएमए बरामद होने के बाद जांच आगे बढ़ी। पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर शिक्षिकाओं की भूमिका सामने आई। विशेष जांच दल (एसआईटी) अब मामले में अन्य संभावित आरोपियों की तलाश कर रहा है।
यह मामला केवल तीन व्यक्तियों पर लगे आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के सामने यह सवाल भी खड़ा करता है कि युवाओं को नशे से बचाने के लिए परिवार, स्कूल और प्रशासन को मिलकर कितनी मजबूत व्यवस्था बनानी होगी। शिक्षा संस्थान बच्चों के लिए सुरक्षित स्थान माने जाते हैं। ऐसे में इस तरह की घटनाएं स्कूलों में नैतिक जिम्मेदारी, कर्मचारी चयन प्रक्रिया और मादक पदार्थ विरोधी जागरूकता को और मजबूत करने की जरूरत की ओर संकेत करती हैं।