

मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : जादवपुर यूनिवर्सिटी ने पिछले 3 वर्षों की वर्किंग कमेटी की बैठकों में लिए गए तमाम फैसलों के दस्तावेज उच्च शिक्षा विभाग को सौंप दिए हैं। विभाग द्वारा पिछले महीने यह रिपोर्ट तलब की जाने के बाद गुरुवार को यूनिवर्सिटी ने पूरे दस्तावेज सौंप दिए। इस कदम के बाद यूनिवर्सिटी के भीतर इस बात पर चर्चा छिड़ गई है कि क्या यह विशेष नियम सिर्फ जादवपुर के लिए है या अन्य विश्वविद्यालयों से भी ऐसी रिपोर्ट मांगी जा रही है। चूंकि वर्किंग कमेटी में पहले से ही उच्च शिक्षा विभाग, चांसलर और वित्त विभाग के प्रतिनिधि शामिल होते हैं जिन्हें हर बैठक का रिजॉल्यूशन नियमित रूप से भेजा जाता है, इसलिए कई लोग इस तरह दोबारा जानकारी मांगने की अनिवार्यता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। इसके विपरीत, पारदर्शिता की वकालत करने वाले समूहों और भारतीय मजदूर संघ से जुड़े कर्मचारी संघ का लंबे समय से मानना है कि हर यूनिवर्सिटी की कमेटियों के फैसले सार्वजनिक होने चाहिए ताकि जनता और सरकार के सामने पूरी पारदर्शिता बनी रहे।
दस्तावेज सौंपने पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
इस आदेश पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं हैं। कुछ शिक्षक दोबारा जानकारी मांगने पर सवाल उठा रहे हैं, तो कुछ इसे सकारात्मक मान रहे हैं। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षणिक महासंघ के सचिव ने कहा कि इन दस्तावेजों से यूनिवर्सिटी के वित्तीय, प्रशासनिक और भर्ती से जुड़े अहम फैसलों की सच्चाई सामने आएगी। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन में जवाबदेही और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करने के लिए इन दस्तावेजों की जांच और जरूरत पड़ने पर इन्हें सार्वजनिक करना बेहद जरूरी है।