JU हिंसा : 37 घंटे बाद एफआईआर, जांच कमेटी गठित

JU हिंसा : 37 घंटे बाद एफआईआर, जांच कमेटी गठित
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एक नजर मुख्य बातों पर

वीसी ने दर्ज कराई एफआईआर, पुलिस ने सुओ मोटो दर्ज किए दो मामले

हिंसा के बाद हाईलेवल जांच कमेटी गठित

बाहरी तत्वों पर लगे गंभीर आरोप

सीसीटीवी फुटेज से खुलेंगे राज

प्रोफेसरों ने कहा - दोषियों को मिले कड़ी सजा

मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : जादवपुर यूनिवर्सिटी कैंपस में छात्रों के दो गुटों के बीच हुई झड़प और तोड़फोड़ के मामले में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आखिरकार पुलिस में आधिकारिक शिकायत दर्ज करा दी है। वाइस-चांसलर चिरंजीव भट्टाचार्य के गुरुवार को घोषणा करने के बावजूद शिकायत दर्ज होने में 37 घंटे का लंबा समय बीत गया, जिससे प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े होने लगे थे। आखिरकार शुक्रवार की सुबह यूनिवर्सिटी की ओर से जादवपुर पुलिस स्टेशन में औपचारिक एफआईआर दर्ज करा दी गई। इसके अलावा जादवपुर विश्वविद्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन के दौरान सड़क ब्लॉक करने एवं पुलिस कर्मियों से धक्का-मुक्की करने के आरोप में पुलिस ने दो सुओ-मोटो मामला दर्ज किया है। इससे पहले बुधवार को एबीवीपी की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गयी थी। अब तक मामले में कुल 4 एफआईआर दर्ज की गयी है।

तीन सदस्यीय हाई-लेवल जांच कमेटी गठित

इस पूरे विवाद और हिंसा की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने एक उच्च स्तरीय तीन सदस्यीय जांच पैनल का गठन कर दिया है। खास बात यह है कि इस कमेटी में शामिल तीनों सदस्य अन्य यूनिवर्सिटी से ताल्लुक रखते हैं ताकि जांच पूरी तरह पारदर्शी रहे। इस विशेष पैनल में नेताजी सुभाष ओपन यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस-चांसलर, बाबासाहेब अंबेडकर यूनिवर्सिटी के मौजूदा वाइस-चांसलर और एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी को शामिल किया गया है, जो 19 और 20 अगस्त को हुई हिंसक घटनाओं की तह तक जाकर अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।

पुलिस शिकायत में लगाए गए गंभीर आरोप

जादवपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई एफआईआर में बुधवार आधी रात के बाद कैंपस में हुई भारी अराजकता का पूरा ब्योरा दिया गया है। शिकायत के मुताबिक, मध्य रात्रि के बाद कई बाहरी तत्व यूनिवर्सिटी परिसर में जबरन घुस आए। इन उपद्रवियों ने गेट नंबर 1 पर लगे सीसीटीवी कैमरों में जमकर तोड़फोड़ की। इसके बाद उन्होंने प्रशासनिक भवन अरविंदो भवन के कोलैप्सिबल गेट के पास आग लगाने की भी कोशिश की। इसके अलावा यूनिवर्सिटी की ऐतिहासिक हेरिटेज पट्टिका को भारी नुकसान पहुंचाने को लेकर भी शिकायत में विशेष रूप से जिक्र किया गया है।

प्रोफेसरों का विरोध और न्यायिक जांच की मांग

यूनिवर्सिटी के इस पूरे घटनाक्रम और प्रतीकात्मक पट्टिका को नुकसान पहुंचाए जाने से आहत प्रोफेसरों ने काम बंद कर अपना कड़ा विरोध जताया है। बंगाली विभाग के प्रोफेसर राजेश्वर सिन्हा ने प्रशासन के इस कदम का स्वागत करते हुए इसे एक शुरुआती और जरूरी प्रयास बताया है। उन्होंने मांग की है कि सीसीटीवी फुटेज की मदद से असली दोषियों की पहचान की जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे वे यूनिवर्सिटी के छात्र हों या बाहर से आए उपद्रवी, सभी दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने पट्टिका में तोड़फोड़ की न्यायिक जांच कराने और सभी सीसीटीवी फुटेज को सार्वजनिक करने की मांग की है।

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