

केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : JIS ग्रुप की शैक्षणिक पहल नरूला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NiT) के ‘स्वागतम 2026’ इंडक्शन प्रोग्राम में बुधवार को बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल और करण देओल ने नए विद्यार्थियों से संवाद किया और उन्हें आत्मविश्वास, मेहनत तथा लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। धनधान्य ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा, सिनेमा और समाज से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा हुई। सनी देओल और करण देओल अपनी आगामी फिल्म ‘बंटवारा 1947’ के प्रमोशन के सिलसिले में कोलकाता पहुंचे थे। फिल्म 14 अगस्त को रिलीज होने जा रही है।
कार्यक्रम का आयोजन नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों के स्वागत और उन्हें संस्थान के शैक्षणिक वातावरण से परिचित कराने के उद्देश्य से किया गया। कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल सरकार की शहरी विकास एवं नगरपालिका मामलों की कैबिनेट मंत्री तथा आसनसोल दक्षिण की विधायक अग्निमित्रा पॉल, JIS ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर सरदार तरनजीत सिंह, जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर सरदार हरनजीत सिंह, डायरेक्टर सरदार सिमरप्रीत सिंह, अभिनेता सनी देओल और फिल्म निर्देशक राजकुमार संतोषी मौजूद रहे।
JIS ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर सरदार तरनजीत सिंह ने कहा कि इंडक्शन प्रोग्राम विद्यार्थियों के जीवन में एक नए अध्याय की शुरुआत है। शिक्षा केवल क्लासरूम और परीक्षाओं तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, चरित्र, जिज्ञासा और बदलती दुनिया के अनुरूप आगे बढ़ने की क्षमता विकसित करनी चाहिए। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को अकादमिक शिक्षा के साथ इंडस्ट्री के अनुभव और वास्तविक दुनिया की चुनौतियों से जोड़ने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण सनी देओल और करण देओल की मौजूदगी रही। दोनों ने विद्यार्थियों से बातचीत की और अपने अनुभव साझा किए। सनी देओल ने युवाओं को अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने और मुश्किल परिस्थितियों में भी प्रयास जारी रखने की प्रेरणा दी। दोनों कलाकारों ने अपनी फिल्म ‘बंटवारा 1947’ के बारे में भी जानकारी साझा की।
फिल्म के निर्देशक राजकुमार संतोषी ने बताया कि ‘बंटवारा 1947’ को असगर वजाहत के चर्चित नाटक ‘जिस लाहौर नई देख्या, ओ जम्याई नई’ से प्रेरणा मिली है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि फिल्म नाटक का सीधा रूपांतरण नहीं है। संतोषी के अनुसार फिल्म में नाटक का करीब 25 से 30 प्रतिशत हिस्सा ही लिया गया है, जबकि लगभग 70 प्रतिशत कहानी नए तरीके से लिखी गई है।
संतोषी ने कहा कि नाटक में इंसानियत, रिश्तों, दर्द और भावनाओं को जिस मजबूती से प्रस्तुत किया गया है, उसे फिल्म में बरकरार रखने की कोशिश की गई है। इसी उद्देश्य से पटकथा और संवाद लिखते समय मूल नाटक के लेखक असगर वजाहत को भी पूरी प्रक्रिया में साथ रखा गया। संतोषी के अनुसार संवाद लेखन में वजाहत की सक्रिय मौजूदगी रही और उन्होंने स्वयं संवाद लिखने में योगदान दिया।
राजकुमार संतोषी ने कहा कि ‘जिस लाहौर नई देख्या, ओ जम्याई नई’ हिंदी के सबसे लोकप्रिय और पसंद किए जाने वाले नाटकों में शामिल है। इसका कई भाषाओं में मंचन और रूपांतरण हो चुका है तथा आज भी इसका मंचन जारी है। ऐसे चर्चित नाटक से प्रेरणा लेकर फिल्म बनाते समय सबसे बड़ी चुनौती उसकी मूल संवेदना और ईमानदारी को बनाए रखना थी।
उन्होंने कहा कि फिल्म विभाजन के दौर में हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच बने मानवीय रिश्तों, भावनाओं और संघर्षों को केंद्र में रखती है। कहानी में यह दिखाने की कोशिश की गई है कि राजनीतिक और सामाजिक विभाजन के बीच इंसानी रिश्ते किस तरह अपनी जगह बनाए रखते हैं। संतोषी ने भरोसा जताया कि फिल्म दर्शकों को शुरुआत से अंत तक बांधे रखने में सफल होगी।
‘बंटवारा 1947’ के जरिए फिल्मकारों ने विभाजन की ऐतिहासिक घटना को केवल राजनीतिक घटना के रूप में नहीं, बल्कि इंसानी रिश्तों, दर्द और भावनाओं के नजरिये से प्रस्तुत करने की कोशिश की है। वहीं, JIS के ‘स्वागतम 2026’ में सिनेमा और शिक्षा का यह संगम नए विद्यार्थियों के लिए खास आकर्षण रहा। कार्यक्रम ने नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ विद्यार्थियों को सीखने, प्रेरणा लेने और समाज व दुनिया को व्यापक नजरिये से समझने का अवसर भी दिया।