नहीं था महाकुंभ, आउट्राम घाट मेले में थी रौनक

गंगासागर मेले ने आउट्राम घाट पर बाजार को किया मजबूत
नहीं था महाकुंभ, आउट्राम घाट मेले में थी रौनक
Published on

30 से 40 प्रतिशत तक अधिक मुनाफा दर्ज

मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : गंगासागर मेले की पवित्र धारा इस बार सिर्फ श्रद्धालुओं की आस्था ही नहीं, बल्कि स्थानीय और बाहरी कारोबारियों की किस्मत भी संवारती नजर आई। ऐतिहासिक आउट्राम घाट पर लगे अस्थायी बाजार में इस साल ऐसी रौनक देखने को मिली, जिसने बीते कुछ वर्षों की कमी को काफी हद तक पूरा कर दिया। घाट पर उमड़ी भारी भीड़ ने दुकानदारों के कारोबार को नई ऊर्जा दी और बिक्री में जबरदस्त उछाल देखने को मिली। दुकानदारों के मुताबिक पिछले साल महाकुंभ के आयोजन के चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहां चले गए थे, जिससे गंगासागर मेले में अपेक्षाकृत कम भीड़ देखने को मिली थी। लेकिन इस बार श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई, जिसका सीधा फायदा अस्थायी बाजार को मिला और कारोबार पहले से कहीं बेहतर रहा।

पिछले साल की कमी इस बार पूरी हुई

मेले के दौरान कई दिनों तक आउट्राम घाट पर बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश समेत आसपास के राज्यों से आए दुकानदारों ने कंबल, बर्तन, पूजा-सामग्री, कपड़े और रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तुओं की दुकानें लगाईं। मेले की अवधि भर श्रद्धालुओं की लगातार आवाजाही बनी रही, जिसका सीधा और सकारात्मक असर बाजार पर पड़ा। दुकानदारों के अनुसार इस साल बिक्री पिछले वर्ष के मुकाबले कहीं बेहतर रही और कई व्यापारियों ने 30 से 40 प्रतिशत तक अधिक मुनाफा दर्ज किया।

बाहरी दुकानदारों के चेहरे पर लौटी मुस्कान

बिहार से आये एक दुकानदार सुबोध दास ने बताया कि पिछले करीब 20 वर्षों से वे गंगासागर मेले के दौरान आउट्राम घाट पर दुकान लगाते आ रहे हैं। उनके अनुसार इस बार मेले का माहौल और बाजार दोनों ही उम्मीद से बेहतर रहे। श्रद्धालुओं की लगातार भीड़ के चलते बिक्री मजबूत बनी रही, जिससे मेहनत का पूरा मोल मिला। वहीं उत्तर प्रदेश से आए अशोक साव ने कहा कि उन्होंने लंबे समय बाद ऐसा महसूस हुआ कि मेले में लगाया गया समय और पूंजी पूरी तरह सफल साबित हुई।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिला सहारा

गंगासागर मेले की वजह से सिर्फ बाहरी ही नहीं, बल्कि स्थानीय कारोबारियों, ठेला-खोमचा वालों और मजदूरों को भी रोजगार मिला। होटल, परिवहन और खाने-पीने के व्यवसाय में भी अच्छी हलचल देखने को मिली। कुल मिलाकर इस बार का गंगासागर मेला आउट्राम घाट के लिए आस्था के साथ-साथ आर्थिक संजीवनी बनकर सामने आया, जिसने कारोबारियों की उम्मीदों को नई उड़ान दी।

संबंधित समाचार

No stories found.

कोलकाता सिटी

No stories found.

खेल

No stories found.
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in