दुर्गापुर ब्रिज को पूरी तरह ठीक होने में लग गये महीनों !

दुर्गापुर ब्रिज को पूरी तरह ठीक होने में लग गये महीनों !
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कोलकाता : न्यू अलीपुर और चेतला को जोड़ने वाला दुर्गापुर ब्रिज को पूरी तरह से ठीक होने में महीनों लग गये। भयावह अग्निकांड ने इस ब्रिज को भारी क्षति पहुंचायी थी। केएमडीए द्वारा इस ब्रिज के कई टेस्ट कराये गये। एक- एक कर कई टेस्ट और फाइनल वजन वहन क्षमता की जांच के बाद ब्रिज पर बड़े वाहनों की आवाजाही की एक बार फिर से हरी झंडी दिखा दी गयी जिससे लोगों ने राहत की सांस ली। यहां बताना जरूरी है कि केएमडीए के लिए इस ब्रिज को फिर से पहले की तरह गति में लाना इतना भी आसान नहीं था। केएमडीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने  बताया कि पिछले साल 21 दिसंबर को ब्रिज के नीचे बस्ती में आग लगने से झाेपड़ियों के साथ ही इस ब्रिज को भी भारी नुकसान पहुंचा था। एक जांच में पता चला कि अग्निकांड में ब्रिज का करीब 30 % स्ट्रेंथ कम हो गया। यह चिंताजनक और चुनौती दोनों ही हमारे सामने थी। दिसंबर के बाद से एक के बाद एक कई जांच की गयी और गत दिनों इस ब्रिज पर बड़े वाहनों के आवागमन की अनुमति दे दी गयी है।

ब्रिज पर इन वाहनों को छूट

आग की घटना के बाद ब्रिज पर बड़े वाहन का आवागमन रोक दिया गया था। केवल छोटी गाड़ियों का ही आवागमन जारी था। अब जाकर बड़े वाहनों के लिए मंजूरी दी गयी है। केएमडीए के एक अधिकारी ने बताया कि दुर्गापुर ब्रिज के दो लेन में भारी वाहनों को छूट मिली है मगर सिंगल लेन में 55 टन से अधिक की अनुमति नहीं होगी। बस, ट्रक, यातायात के अन्य वाहनों को छूट है। पहले की तरह बसें चालू कर दी गयी हैं। इससे बेहला, चेतला - न्यू अलीपुर सहित दक्षिण कोलकाता के विभिन्न गंतव्य में यातायात वाले लोगों को सुविधा होगी।

ब्रिज पर खर्च हुए 79 लाख रुपये

हाल में दुर्गापुर ब्रिज की मरम्मत का काम केएमडीए द्वारा किया गया। ब्रिज का हेल्थ चेक अप कराया गया था। इसके बाद से कई मरम्मत कार्य किये गये। गार्डर रिपेयरिंग, स्ट्रेंथ टेस्टिंग, कार्बन फाइबर, लोड टेस्टिंग सहित कई कई कार्य इनमें शामिल हैं। कुल मिलाकर ब्रिज को फिर से ठीक करने में लगभग 79 लाख रुपये खर्च किये गये। आगे भी ब्रिज का हेल्थ चेक अप किया जायेगा।

ये पहुंचा था नुकसान

केएमडीए सूत्रों ने बताया कि आग की घटना ने ब्रिज के कंक्रीट पर भी असर डाला। काम शुरू करने से पहले लाेड टेस्टिंग हुई। ग्राउटिंग, गनिटिंग और अन्य आवश्यक मरम्मत कार्य हुए। ग्राउटिंग प्रक्रिया बेहद ही अहम रही। इससे संरचना को मजबूत बनाने में मदद मिलती है। ब्रिज पर भारी वाहन को हरी झंडी देने से पहले हाल में लोड टेस्टिंग की गयी है।

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