

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका-ईरान शांति समझौते को रद्द करने की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी आ गई है। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड करीब 1% चढ़कर 78.80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड भी 1.01% की बढ़त के साथ 74.26 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।
इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में भी कच्चे तेल की कीमतों में करीब 5% का उछाल दर्ज किया गया था। भारत के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर जुलाई फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट भी 6.71% की तेज बढ़त के साथ 7,155 रुपये प्रति बैरल पर बंद हुआ।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुए सैन्य हमलों के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ गया है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के लिए बेहद अहम है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर सप्लाई होने वाले करीब 20% कच्चे तेल का परिवहन इसी रास्ते से होता है।
इसके अलावा, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा ईरान को कानूनी रूप से कच्चा तेल बेचने के लिए दी गई रियायतें वापस लेने से भी बाजार में सप्लाई कम होने की आशंका बढ़ गई है। इसी वजह से निवेशकों के बीच चिंता बढ़ी है और तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका-ईरान तनाव के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों और एलएनजी (LNG) जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। सुरक्षा जोखिम बढ़ने के कारण कई जहाज अब लंबा रास्ता अपनाते हुए केप ऑफ गुड होप के जरिए अपने गंतव्य तक पहुंच रहे हैं।
होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारों में से एक है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, ईरान, कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देश अपने ऊर्जा निर्यात के लिए इसी मार्ग पर निर्भर हैं। यदि इस मार्ग पर लंबे समय तक बाधा बनी रहती है तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की भारी कमी और कीमतों में और तेज उछाल देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों, महंगाई और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।