इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का संघर्षविराम हुए कुछ घंटे भी नहीं हुए हैं और ईरान ने फिर से इजराइल को बड़े मिसाइल हमलों की धमकी दे डाली है। हैरान करने वाली बात यह है कि कुछ ही घंटे में यह संघर्षविराम जिस कारण टूटता नजर आ रहा है, वह कारण न तो ईरान पर हमले हैं, न ही खाड़ी देशों पर हमले और न ही इजराइल या अमेरिका के ठिकानों पर हमले। बुधवार सुबह ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत के लिए दो हफ्ते के संघर्ष विराम की घोषणा की थी। ईरान ने भी इस शर्त पर हमले रोकने की बात कही थी कि उस पर हमले नहीं हुए तो उसकी सेनाएं भी हमले नहीं करेंगी।
ईरान और अमेरिका के बीच हुए संघर्षविराम को इजराइल ने भी सहमति दी थी। इस संघर्षविराम के लिए ईरान ने 10 बिन्दू तय किए हैं। ट्रंप ने इन्हें विचार योग्य बताया था। इन बिन्दुओं के साथ ईरान ने जो शर्तें लगाई हैं, उसके अनुसार यदि इजराइल या अमेरिका ईरान पर हमला नहीं करेंगे तो ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोल देगा, ताकि वहां से तेल और गैस के जहाज गुजर पाएं। इसके साथ ही यह शर्त भी लगाई गई है कि जहाजों को गुजरने की अनुमति तभी दी जाएगी, जब उनके बारे में पहले से सूचना दी गई हो। ईरान ने एक शर्त यह भी रखी है कि यह संघर्ष विराम केवल ईरान के मामले में नहीं होगा, इजराइल को अपने पड़ोसी देश लेबनान पर भी हमले रोकने होंगे।
ईरान ने जो शर्तें रखी थीं, उन पर सुबह तो इजराइल ने भी सहमति जताई थी, लेकिन कुछ ही घंटे बाद इजराइल ने ऐसी बात कह दी, जिससे ईरान-अमेरिका सीजफायर खतरे में पड़ गया। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कह दिया कि यह दो हफ्तों का सीजफायर लेबनान पर लागू नहीं होता। इजराइल के प्रधानमंत्री ने एक बयान में कहा, "इजराइल, राष्ट्रपति ट्रंप के उस फैसले का समर्थन करता है, जिसके तहत ईरान के खिलाफ हमलों को दो हफ्तों के लिए रोक दिया गया है. यह समर्थन इस शर्त पर है कि ईरान तुरंत जलडमरूमध्य (स्ट्रेट्स) को खोल दे और अमेरिका, इजरायल व इस क्षेत्र के अन्य देशों पर होने वाले सभी हमलों को रोक दे।" इजराइल की यही बात ईरान को नागवार गुजरी है।
ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने एक्स पोस्ट में कहा है, "अगर दक्षिणी लेबनान में गोलीबारी कुछ ही घंटों में नहीं रुकी, तो वायु सेना और मिसाइल यूनिट्स तेल अवीव पर बमबारी करना शुरू कर देगी।"
ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद @x.com
ईरान को इजराइल की यह हरकत बिल्कुल पसंद नहीं आई। कारण यह है कि लेबनान में हिज्बुल्ला को ईरान ही पालता है और हिज्बुल्ला के लड़ाके ईरान के पक्ष में इजराइल पर हमले करते रहे हैं। इजराइल लेबनान पर हमले इसीलिए कर रहा है ताकि वहां से हिज्बुल्ला को उसी तरह खत्म किया जा सके, जैसे गाजा पट्टी से आतंकी संगठन हमास को मिट्टी में मिला दिया। ईरान ने इसी कारण अब इजराइल को सीधी चेतावनी दे डाली है। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने एक्स पोस्ट में कहा है, "अगर दक्षिणी लेबनान में गोलीबारी कुछ ही घंटों में नहीं रुकी, तो वायु सेना और मिसाइल यूनिट्स तेल अवीव पर बमबारी करना शुरू कर देगी।"