सोने का बाजार $30-$35 ट्रिलियन में पहुंचा, ईरान युद्ध के बीच निवेशक सुरक्षित आश्रय की ओर

गोल्ड रेट्स $5,600 प्रति औंस तक, भारत और ब्रिटेन की कुल GDP से भी बड़ा आर्थिक प्रभाव
सोने का बाजार $30-$35 ट्रिलियन में पहुंचा, ईरान युद्ध के बीच निवेशक सुरक्षित आश्रय की ओर
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ईरान युद्ध के बीच सोने की कीमतें तेजी से बढ़कर वैश्विक $30-$35 ट्रिलियन के "अर्थव्यवस्था" स्तर पर पहुंच गई हैं, जो भारत और ब्रिटेन की संयुक्त GDP से कहीं अधिक है। अमेरिका समर्थित इज़राइल के ईरान पर हमलों और इसके बाद तेहरान की जवाबी कार्रवाई के बाद निवेशक सुरक्षित आश्रय की ओर दौड़ पड़े।

अंतरराष्ट्रीय सोने के मानक मूल्य $5,400 प्रति औंस से ऊपर और रिकॉर्ड स्तर $5,600 के करीब पहुंच गए हैं। पिछले कई सालों से चल रही केंद्रीय बैंक की खरीदारी और महामारी के बाद की मुद्रास्फीति की चिंताओं के बीच यह रैली और तेज हुई।

सोने का यह तेजी का दौर 13 साल के ट्रेडिंग बेस से बाहर निकलने जैसा है, जैसा 1972 और 2005 में देखा गया था। विशेषज्ञों के अनुसार, युद्ध ने बुलियन को एक "वित्तीय महाशक्ति" बना दिया है, जो भूराजनीतिक जोखिम बढ़ने पर मूल्य में और बढ़ती है।

जैसे ही युद्ध की खबरें आती हैं—गल्फ में मिसाइल हमले, हॉर्मुज स्ट्रेट बंद होने की धमकी या ऊर्जा अवसंरचना पर हमले—सायक्लिकल इक्विटीज़ बिकती हैं और निवेशक सोने की ओर पलायन करते हैं। इसके अलावा, युद्ध ने तेल की कीमतों को भी बढ़ाया और वैश्विक शेयर बाजारों में उथल-पुथल मचाई।

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