

चेन्नईः तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि ने मंगलवार को राज्य विधानसभा में अपने परंपरागत अभिभाषण के दौरान राज्य की द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) सरकार द्वारा तैयार किया गया संबोधन पढ़ने से इनकार कर दिया क्योंकि उसमें ‘‘गलतियां’’ थीं। यह बात लोकभवन की ओर से कही गई। लोकभवन ने यह भी आरोप लगाया कि राज्यपाल का माइक बंद किया गया।
रवि के बिना संबोधन दिए 234-सदस्यीय विधानसभा से बाहर निकलने के कुछ ही देर बाद, लोक भवन ने 13-बिंदुओं में यह बताया कि राज्यपाल ने संबोधन पढ़ने से क्यों इनकार किया। उसने आरोप लगाया गया कि राज्यपाल का ‘‘माइक बार-बार बंद किया गया और उन्हें बोलने नहीं दिया गया।’’ उसने कहा, ‘‘उक्त अभिभाषण में कई असत्यापित दावे और भ्रामक बयान थे। लोगों को परेशान करने वाले कई महत्वपूर्ण मुद्दों की अनदेखी की गई।’’
तमिलनाडु सरकार का दावा तथ्य से परे
लोक भवन ने आरोप लगाया कि तमिलनाडु सरकार का यह दावा कि राज्य में 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बड़ा निवेश आया है, सत्य से बहुत दूर है। उसने कहा, “संभावित निवेशकों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) केवल कागजों तक ही सीमित हैं। वास्तविक निवेश इसका बहुत छोटा हिस्सा ही है। निवेश के आंकड़े से पता चलता है कि तमिलनाडु निवेशकों के लिए कम आकर्षक होता जा रहा है। चार साल पहले तक तमिलनाडु राज्यों में से विदेशी प्रत्यक्ष निवेश का चौथा सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता था। आज यह छठे स्थान पर बने रहने के लिए संघर्ष कर रहा है।’’
लोकभवन ने आरोप लगाया, “राष्ट्र गान का फिर से अपमान किया गया और मूलभूत संवैधानिक कर्तव्य की अनदेखी की गई।” बयान में कहा गया है कि दलितों के खिलाफ अत्याचार और दलित महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसे पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।