राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर जिले में कार्यक्रमों की पहल

राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर जिले में कार्यक्रमों की पहल
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सन्मार्ग संवाददाता

हुगली: आगामी 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर जिले में विभिन्न कार्यक्रमों की शुरुआत की गई है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की सुनवाई प्रक्रिया के बीच चुनाव आयोग ने भावी मतदाताओं में मतदान के महत्व को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए पहल की है। इस क्रम में चुंचूड़ा के सकांतनगर स्थित अनुकूलचंद्र शिक्षाश्रम में जिले के चारों सब डिवीजन के 46 छात्र-छात्राओं के बीच चित्रांकन, वाद-विवाद, निबंध लेखन और नारा लेखन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।

चुनाव आयोग का उद्देश्य छात्र और युवा मतदाताओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने के महत्व से अवगत कराना है। इस तरह के कार्यक्रम भविष्य में मतदाता सक्रियता और जिम्मेदारी की भावना को बढ़ाने में सहायक माने जाते हैं। प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले छात्रों ने उत्साहपूर्वक अपनी प्रतिभा दिखाई और लोकतंत्र के प्रति अपनी जागरूकता व्यक्त की।

हालांकि, मौजूदा एसआईआर प्रक्रिया के कारण इस आयोजन को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि एसआईआर के नाम पर आम मतदाताओं को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई बुजुर्ग और ग्रामीण इस प्रक्रिया में घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं, और कुछ मामलों में मौत की घटनाएं भी सामने आई हैं। ऐसे में कई लोगों ने इस समय मतदाता दिवस कार्यक्रम आयोजित करने पर असहमति व्यक्त की है।

स्वाभाविक रूप से तृणमूल कांग्रेस ने भी इस कार्यक्रम का विरोध किया है। अनुकूल स्कूल के शिक्षक एवं तृणमूल नेता शुभेंदु गड़ाई ने कहा कि सुनवाई के नाम पर मतदाताओं को अत्यधिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि प्रशासन और चुनाव आयोग को इस प्रक्रिया को सरल बनाने और आम लोगों की सुविधा का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

कार्यक्रम में जिले के प्रभारी निर्वाचन अधिकारी पार्थप्रतिम, नोडल अधिकारी (एसवीईईपी) मौली सान्याल, विद्यालय के प्रधान शिक्षक हाशमात अली सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। छात्र-छात्राओं ने प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर भाग लिया और मतदान और लोकतंत्र के महत्व पर अपने विचार साझा किए।

हालांकि, मतदाता दिवस मनाने को लेकर अधिकारियों की ओर से इस विवादित माहौल पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। कार्यक्रम ने छात्रों और युवाओं में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया, जबकि आम जनता में एसआईआर के चलते निराशा और सवाल अभी भी बरकरार हैं।

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