श्रमिक संगठनों की हड़ताल के बीच औद्योगिक संबंध संहिता संशोधन विधेयक लोस में पारित

लोकसभा ने बृहस्पतिवार को ‘औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026’ को पारित कर दिया और सरकार ने संहिता के संबंध में विपक्ष की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि यह श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन की गारंटी देती है।
औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक,  2026 के संबंध में बोलते केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया
औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026 के संबंध में बोलते केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया
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नई दिल्लीः लोकसभा ने बृहस्पतिवार को ‘औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026’ को पारित कर दिया और सरकार ने संहिता के संबंध में विपक्ष की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि यह श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन की गारंटी देती है।

केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने सदन में विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा, ‘‘इस श्रम संहिता में हमने सुनिश्चित किया है कि संवैधानिक सुरक्षा मानकों के साथ न्यूनतम वेतन मानक तय करेंगे। देश में महिलाओं और पुरुषों को समान वेतन पाने का अधिकार होगा।’’ मंत्री ने कहा कि औद्योगिक संबंध संहिता तो 2020 में ही पारित हो चुकी है और ढाई महीने पहले लागू भी हो चुकी है, लेकिन अधिकतर सदस्यों ने चर्चा में संहिता की ही बात की है और इसे कामगार विरोधी बताया है।

मांडविया ने कहा, ‘‘हम तो एक छोटा सा संशोधन लाए हैं। यह संशोधन केवल कानूनी स्पष्टता के लिए सदन में लाया गया।’’ उनके जवाब के बाद सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को पारित कर दिया। औद्योगिक सबंध संहिता, 2020 ने जिन कानूनों की जगह ली है, उनमें ट्रेड यूनियन्स अधिनियम, 1926, औद्योगिक रोजगार (स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946 और औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 शामिल हैं, जो श्रमिक संघों, औद्योगिक रोजगार और औद्योगिक विवादों से संबंधित हैं।

श्रमिकों के हित में संहिता लाया गया

मांडविया ने कहा, ‘‘हम श्रमिकों के हित में एक संहिता लाए। तीन कानूनों को इसमें शामिल किया गया। उन्हें निरस्त करने का अधिकार सरकार को है और निरस्त कर दिया गया है, लेकिन कानून में भी यह बात शामिल हो, इसलिए संशोधन विधेयक लाया गया।’’ संहिता के विरोध में देशभर में हड़ताल को लेकर विपक्ष के कुछ सदस्यों की टिप्पणियों पर मंत्री ने कहा, ‘‘चंद श्रमिक संगठनों ने विरोध किया होगा, 17 राष्ट्रीय संगठनों ने तो बंद को अनुचित बताया है। श्रमिकों के हित में यह संहिता लाई गई है।’’ उन्होंने कहा कि विपक्ष ने भी बंद की हकीकत देखी होगी। उन्होंने कहा, ‘‘देश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और सच के साथ रहेगा। आपकी (विपक्ष की) बात सच होती तो देश सड़क पर होता।’’

मांडविया ने आरएसपी सांसद एन के प्रेमचंद्रन के आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि वामपंथी दलों के सदस्यों ने इस संहिता के खिलाफ जोर-शोर से बात रखी है। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने राज्य में ईएसआईसी का एक मेडिकल कॉलेज दिया। केरल में इनकी सरकार है। राज्य सरकार ने मेडिकल कॉलेज चालू करने के लिए आवश्यक प्रमाणपत्र तक नहीं दिया। इन्हें श्रमिकों के बारे में बात करने का कोई अधिकार नहीं है।’’ उन्होंने कहा कि इस सरकार का उद्देश्य उद्योग भी चलाना है और कामगारों के हितों की सुरक्षा भी करनी है क्योंकि उद्योग नहीं होंगे तो रोजगार नहीं होगा।

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मांडविया ने तृणमूल सांसदों पर किया पलटवार

उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि इनके कारण नैनो परियोजना को बंगाल से गुजरात आना पड़ा और ये लोग श्रमिकों की बात करते हैं। मांडविया ने कहा कि श्रम संहिता में हर युवा को नियुक्ति पत्र देने की गारंटी है ताकि भविष्य में नियोक्ता यह नहीं कह सके कि यह हमारा कर्मचारी नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को केवल विरोध के लिए आलेाचना नहीं करनी चाहिए और उनके अच्छे विचारों का सरकार स्वागत करेगी। मांडविया ने कहा कि औद्योगिक संबंध संहिता लागू हुए ढाई महीने हो चुके हैं और इस दौरान दो सर्वेक्षण किए गए। पहले सरकारी सर्वेक्षण में 60 प्रतिशत से अधिक श्रमिकों ने विश्वास जताया है कि संहिता लागू होने से नियम शर्तें स्पष्ट हुई हैं, नौकरी की सुरक्षा मजबूत होगी।मंत्री ने कहा कि एक निजी संस्था के दूसरे सर्वेक्षण में अधिकतर श्रमिकों ने माना कि टीयर-3 और 4 शहरों में रोजगार मजबूत हो रहा है और महिलाओं के लिए अवसरों में तुलनात्मक बढ़ोतरी हो रही है।

औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक क्या है

यह विधेयक 11 फरवरी यानी कल लोकसभा में पेश किया गया और आज इसे पारित कर दिया गया। इस संशोधन विधेयक का प्राथमिक उद्देश्य औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के तहत पुराने श्रम कानूनों के निरसन से जुड़ी कानूनी स्थिति को स्पष्ट करना है। यह उन तीन पुराने कानूनों की निरंतरता और निरसन के संबंध में किसी भी "भविष्य की अवांछित जटिलता" को रोकने के लिए लाया गया है जिन्हें 2020 की संहिता में शामिल किया गया था।

विधेयक यह स्पष्ट करता है कि इन पुराने कानूनों का निरसन धारा 104 के संचालन के माध्यम से एक वैधानिक परिणाम है, न कि केवल एक कार्यकारी कार्रवाई। यह विधेयक ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926, औद्योगिक रोजगार (स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946 और औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 को निरस्त करता है।

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