चीन के तकनीकी अंकुश से भारत का सौर विनिर्माण प्रभावित होने का जोखिम : इंडिया रेटिंग्स
नयी दिल्ली : सौर उपकरण विनिर्माण से जुड़ी 12 प्रमुख प्रौद्योगिकियों के निर्यात पर नियंत्रण लगाने की चीन की प्रस्तावित योजना से भारत में सौर सेल विनिर्माण क्षमता बढ़ाने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (इंड-रा) ने यह आशंका जताई है। चीन का वैश्विक सौर आपूर्ति शृंखला के 75 प्रतिशत से अधिक हिस्से पर नियंत्रण है। उसने इससे संबंधित कई प्रौद्योगिकियों के निर्यात पर नियंत्रण का प्रस्ताव दिया है। चीन का कहना है कि इनका इस्तेमाल वैमानिकी, रक्षा और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में भी होने से इनकी निगरानी जरूरी है। रेटिंग एजेंसी ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में कहा कि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर रोक से सौर सेल विनिर्माण में क्षमता विस्तार की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इससे घरेलू सामग्री आवश्यकता (डीसीआर) वाले सेल की मांग-आपूर्ति का संतुलन और बाजार में कीमतों व कंपनियों के मुनाफे पर भी असर पड़ सकता है। यह जोखिम सरकार की एएलएमएम-2 नीति की समयसीमा को भी प्रभावित कर सकता है। इस नीति के तहत सौर मॉड्यूल विनिर्माताओं को अनुमोदित सूची से भारतीय निर्मित सेल खरीदने होते हैं। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के निदेशक भानु पटनी ने कहा, ‘प्रस्ताव के लागू होने पर सौर विनिर्माण में इस्तेमाल होने वाले शुरुआती घटकों के घरेलू उत्पादन की क्षमता बढ़ाने की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। पहले ही आपूर्ति सुनिश्चित कर चुकी कंपनियों पर असर कम होने की संभावना है, जबकि अब पूंजीगत खर्च की योजना बना रही कंपनियों को अधिक जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। सौर विनिर्माण क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों को पहले नीतिगत समर्थन से लाभ मिला है। इसलिए भारी पूंजी निवेश और कर्ज चुकाने लायक मुनाफा कमाने की क्षमता के लिए नीतिगत समर्थन महत्वपूर्ण है।’ वोल्क्स एनर्जी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पीयूष गोयल ने सरकार से स्वदेशी उपकरणों के विकास के लिए मिशन शुरू करने, प्रौद्योगिकी के स्वामित्व के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना का समर्थन देने और जापान, दक्षिण कोरिया तथा यूरोप के साथ साझेदारी तलाशने का सुझाव दिया। वहीं, सनकाइंड इंडिया के प्रबंध निदेशक हनीश गुप्ता ने कहा कि अंतिम असर नियमों, लाइसेंस संबंधी प्रावधानों और वैकल्पिक प्रौद्योगिकी साझेदारों की उपलब्धता पर निर्भर करेगा। हालांकि, भारत को चीन के इस प्रस्ताव को चेतावनी के रूप में लेना चाहिए।

