दक्षिण चीन सागर में भारत की दमदार एंट्री, चीन की दादागिरी पर 5 रणनीतिक वार

साउथ चाइना सी पर भारत का सख्त रुख, अंतरराष्ट्रीय कानून और मुक्त इंडो-पैसिफिक की वकालत; चीन की 'नाइन-डैश लाइन' नीति को चुनौती
दक्षिण चीन सागर में भारत की दमदार एंट्री, चीन की दादागिरी पर 5 रणनीतिक वार
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नई दिल्ली: दक्षिण चीन सागर (South China Sea) के विवादित क्षेत्र को लेकर भारत ने पहली बार स्पष्ट और मजबूत रणनीतिक रुख अपनाया है। वर्षों तक इस विवाद से दूरी बनाए रखने के बाद अब भारत ने संकेत दिया है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उसके बढ़ते आर्थिक और सामरिक हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत ने साफ कहा है कि दक्षिण चीन सागर से जुड़े सभी विवादों का समाधान अंतरराष्ट्रीय कानूनों और शांतिपूर्ण वार्ता के जरिए होना चाहिए।

भारत ने दोहराया कि संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून (UNCLOS) का सम्मान और मुक्त, खुला एवं सुरक्षित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र वैश्विक व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अनिवार्य है। भारत का यह रुख ऐसे समय सामने आया है जब चीन पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपने व्यापक दावे को लेकर लगातार आक्रामक रवैया अपनाए हुए है।

भारत के लिए क्यों अहम है दक्षिण चीन सागर?

भारत के समुद्री व्यापार का बड़ा हिस्सा दक्षिण चीन सागर के रास्ते होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव या अस्थिरता सीधे भारत की अर्थव्यवस्था और व्यापारिक हितों को प्रभावित कर सकती है। यही वजह है कि नई दिल्ली अब इस क्षेत्र के घटनाक्रम पर खुलकर अपनी राय रखने लगी है।

चीन के दावों पर अंतरराष्ट्रीय अदालत की मुहर नहीं

साल 2016 में स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (Permanent Court of Arbitration) ने फिलीपींस की याचिका पर फैसला सुनाते हुए चीन की विवादित 'नाइन-डैश लाइन' को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध करार दिया था। हालांकि, चीन ने इस फैसले को मानने से इनकार कर दिया और इसे पूरी तरह खारिज कर दिया।

चीन 1982 में UNCLOS समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले देशों में शामिल रहा है, लेकिन उसने इस मामले में अदालत की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया और बाद में फैसले को अस्वीकार कर दिया।

ASEAN की कमजोरी का मिला चीन को फायदा

दक्षिण चीन सागर को लेकर ASEAN देशों के बीच एकजुट रणनीति नहीं बन सकी। फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई और अन्य देशों के अलग-अलग रुख का लाभ उठाकर चीन ने धीरे-धीरे विवादित द्वीपों पर सैन्य और रणनीतिक मौजूदगी बढ़ाई।

भारत की रणनीतिक एंट्री से बदलेगा समीकरण

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की सक्रिय भूमिका से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन बदल सकता है। अंतरराष्ट्रीय कानूनों के समर्थन, समुद्री सुरक्षा पर जोर, रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत करने और मुक्त नौवहन की वकालत के जरिए भारत अब क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे में अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इससे चीन की एकतरफा दावेदारी को चुनौती मिलने के साथ-साथ दक्षिण चीन सागर में नियम-आधारित व्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।

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