भारतीय नौसेना को मिली नई ताकत, अब दुश्मनों की खैर नहीं

80% स्वदेशी तकनीक से तैयार ASW युद्धपोत नौसेना में शामिल, समुद्री सुरक्षा और एंटी-सबमरीन क्षमता को मिलेगा बड़ा बल
भारतीय नौसेना को मिली नई ताकत, अब दुश्मनों की खैर नहीं
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करवार: भारतीय नौसेना ने अपनी समुद्री ताकत को और मजबूत करते हुए मंगलवार को करवार नौसैनिक अड्डे पर स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित INS मालवन को औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल कर लिया। यह माहे श्रेणी (Mahe-class) की एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) श्रृंखला का दूसरा युद्धपोत है।

कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने की। इस अवसर पर पश्चिमी नौसैनिक कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वात्सायन, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) के अधिकारी, नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी, पूर्व सैनिक और कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।

छत्रपति शिवाजी महाराज की समुद्री विरासत से जुड़ा नाम

INS मालवन का नाम महाराष्ट्र के ऐतिहासिक तटीय शहर मालवन के नाम पर रखा गया है, जो छत्रपति शिवाजी महाराज की समृद्ध समुद्री विरासत से जुड़ा हुआ है। यह नाम भारतीय नौसेना के उस पुराने माइंसवीपर पोत की विरासत को भी आगे बढ़ाता है, जिसने वर्ष 2003 तक सेवा दी थी।

80 प्रतिशत स्वदेशी तकनीक से तैयार

कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित INS मालवन में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। यह जहाज भारत सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान और रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी जहाज निर्माण की बढ़ती क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण है।

INS मालवन आठ ASW-SWC जहाजों की श्रृंखला का दूसरा और भारतीय नौसेना में शामिल होने वाला कुल 16 में से छठा एंटी-सबमरीन शैलो वाटर क्राफ्ट है।

पनडुब्बियों की खोज और समुद्री सुरक्षा में अहम भूमिका

यह युद्धपोत अत्याधुनिक अंडरवॉटर सर्विलांस, एंटी-सबमरीन वारफेयर (ASW), लो इंटेंसिटी मैरीटाइम ऑपरेशंस (LIMO) और माइन वारफेयर जैसी क्षमताओं से लैस है। इसके शामिल होने से तटीय सुरक्षा, समुद्री निगरानी और भारत की Maritime Domain Awareness को नई मजबूती मिलेगी।

'बाघ नखा' बना पहचान का प्रतीक

INS मालवन के प्रतीक चिन्ह (क्रेस्ट) में 'बाघ नखा' को दर्शाया गया है, जो साहस, रणनीतिक युद्ध कौशल, फुर्ती और दुश्मन पर अचानक प्रहार की क्षमता का प्रतीक है। जहाज का आदर्श वाक्य 'Silent Claws' रखा गया है, जो उसकी गोपनीय, घातक और तेज हमला करने की क्षमता को दर्शाता है।

वायुसेना प्रमुख ने की स्वदेशी रक्षा निर्माण की सराहना

समारोह को संबोधित करते हुए एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के दौर में समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने भारतीय नौसेना द्वारा स्वदेशी युद्धपोत निर्माण में हासिल की गई उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि रक्षा क्षेत्र के अन्य अंग भी इस मॉडल से प्रेरणा लेकर आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी ला सकते हैं।

उन्होंने तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और संयुक्त अभियान क्षमता पर भी जोर देते हुए कहा कि भविष्य की चुनौतियों का सामना भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना को एकजुट होकर करना होगा।

नौसेना की ताकत में बड़ा इजाफा

INS मालवन के शामिल होने से भारतीय नौसेना की एंटी-सबमरीन क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। यह युद्धपोत बड़े युद्धपोतों, पनडुब्बियों और नौसैनिक विमानों के साथ समन्वय स्थापित कर प्रभावी अभियान चलाने में सक्षम है। इसके साथ ही भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में देश की समुद्री सीमाओं और रणनीतिक हितों की सुरक्षा के लिए और अधिक सक्षम तथा भविष्य के लिए तैयार हो गई है।

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