H-1B वीजा लेकर अमेरिका में काम करने वाले बंधुआ मजदूर : वेंस

अमेरिकी उपराष्ट्रपति की टिप्पणी प्रवासी पेशेवरों का अपमान : भारत
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे डी वेंस (फाइल फोटो)
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विदेश मंत्रालय ने कहा : H-1B वीजा लेने वालों में 71% भारतीय, अमेरिकी अर्थव्यवस्था संभाल रहे

वॉशिंगटन/नयी दिल्ली : अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने H-1B वीजा पर अमेरिका में काम करने वाले विदेशी पेशेवरों को ‘बंधुआ मजदूर’ बताया है। भारत ने वेंस के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में प्रवासियों की अहम भूमिका रही है। भारत ने यह भी कहा कि वेंस द्वारा प्रयुक्त शब्दों का इस्तेमाल बेहद अपमानजनक है, जो अतीत के दर्दनाक अनुभवों और औपनिवेशिक विरासत की याद दिलाते हैं।

माइक्रोसॉफ्ट वीजा व्यवस्था का गलत इस्तेमाल कर रहे : वेंस

वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट पर वीजा व्यवस्था का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों की जगह अमेरिकी लोगों को नौकरी देनी चाहिए। वेंस के अनुसार पिछले एक साल में माइक्रोसॉफ्ट ने 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला। जबकि इसी दौरान कंपनी को 6,300 H-1B वीजा और करीब 3,000 ग्रीन कार्ड का फायदा मिला। उन्होंने इस व्यवस्था को शर्मनाक बताते हुए इसे खत्म करने की बात कही।

8 IT कंपनियों के ग्रीन कार्ड प्रोग्राम पर रोक

अमेरिका ने 8 बड़ी IT कंपनियों को ग्रीन कार्ड से जुड़ी PERM (प्रोग्राम इलेक्ट्रॉनिक रिव्यू मैनेजमेंट) प्रक्रिया से सस्पेंड कर दिया है। इनमें भारत की इन्फोसिस, टाटा, विप्रो, HCL और कॉग्निजेंट के साथ माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी और कैपजेमिनी शामिल हैं। हालांकि PERM प्रक्रिया पर रोक लगने से पहले से जारी H-1B वीजा अपने आप रद्द नहीं होते। लेकिन इन कंपनियों के जिन कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया चल रही है, उन्हें देरी का सामना करना पड़ सकता है।

भारतीय पेशेवरों की विशेषज्ञता नजरअंदाज की : विदेश मंत्रालय

भारत ने इन टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की भाषा भारतीय पेशेवरों के योगदान और उनकी विशेषज्ञता को नजरअंदाज करती है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि H-1B वीजा कार्यक्रम भारतीय पेशेवरों के लिए अवसर पैदा करने के साथ अमेरिकी कंपनियों को कुशल प्रतिभाएं उपलब्ध कराने में भी मदद करता है। इससे इनोवेशन, रिसर्च, उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ावा मिलता है। इससे दोनों देशों को फायदा होता है। अमेरिका में H-1B वीजा पाने वालों में 71 फीसदी भारतीय हैं। मंत्रालय के अनुसार विदेशी पेशेवरों की विशेषज्ञता अमेरिकी कंपनियों को आगे बढ़ने और रोजगार के नये अवसर पैदा करने में भी मदद कर सकती है।

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