नयी दिल्ली : भारत ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘टैरिफ बम’ के बावजूद न केवल रूस से तेल खरीदना जारी रखने का निर्णय लिया है बल्कि इस चुनौती का सामना करने के लिए कूटनीतिक विकल्प तलाशना शुरू कर दिया।इन्हीं प्रयासों के तहत रूस से तेल व रक्षा सामानों के सौदों को ‘पक्का’ करने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल मास्को पहुंच गये हैं जबकि विदेशमंत्री एस जयशंकर इसी माह के आखिर में रूस का दौरा करेंगे।
एस-400 और एसयू-57 फाइटर जेट भी खरीद पर विचार
घटनाक्रम से वाकिफ सूत्रों के अनुसार भारत रूस के साथ अपने रक्षा संबंध ज्यादा बढ़ाना चाहता है। सूत्रों ने जोर देकर कहा कि भारत ने तय किया है कि अमेरिका की नाराजगी के बावजूद वह रूस से अपने संबंधों की डोर कमजोर नहीं होने देगा। बताया जाता है कि भारत रूस से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में पाकिस्तान की मिसाइलों को नाकाम करने वाले डिफेंस सिस्टम एस-400 की और ज्यादा खरीद करना चाहता है। इसके अलावा भारत रूस से पांचवीं पीढ़ी के एसयू-57 फाइटर जेट भी खरीदने पर विचार कर रहा है।
एस-400 के लिए एमआरओ सुविधा लेने पर भी विचार
एक रिपोर्ट के अनुसार भारत एस-400 के लिए रखरखाव, मरम्मत और संचान (एमआरओ) सुविधा हासिल करने पर भी विचार कर रहा है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद आयी खबरों के अनुसार हालांकि ट्रंप ने भारत को एफ-35 फाइटर जे देने की पेशकश की थी मगर भारत ने अभी तक इस पर विचार नहीं किया है। समझा जाता है कि भारत ने एफ-35 के मुकाबले रूस के एसयू-57 फाइटर जेट की खरीद में दिलचस्पी दिखायी है। रिपोर्ट यह भी बताती हैं कि भारत की रूस से दोस्ती के चलते उसे खनिजों से भरपूर आर्कटिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा।
जयशंकर सर्गेई लावरोव और डेनिस मानतुरोव से मिलेंगे
इसके अलावा भारत का रूस को निर्यात और बढ़ाने पर जोर दिया जायेगा। जयशंकर रूस के जब रूस के विदेशमंत्री सर्गेई लावरोव और पहले उपप्रधानमंत्री डेनिस मानतुरोव से मिलेंगे तो इस पर गंभीर चर्चा हो सकती है। बताया जाता है कि भारत इस साल भारत-रूस शिखर सम्मेलन के अगले दौर का आयोजन करने जा रहा है। इसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी शामिल होंगे। अगर ऐसा होता है तो 2021 के बाद यह पहली बार होगा, जब पुतिन नयी दिल्ली का दौरा करेंगे।