भारत-अमेरिका व्यापार समझौता जल्द!

मार्को रुबियो बोले- ‘भारत हमारा महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार’
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता जल्द!
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वॉशिंगटन : भारत दौरे से लौटे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को अमेरिका का "महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार" बताते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता जल्द अंतिम रूप ले सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले कुछ हफ्तों में इस दिशा में बड़ी प्रगति देखने को मिल सकती है।

अमेरिकी संसद की हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी में भारत यात्रा को लेकर पूछे गए सवालों के जवाब में रुबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका के रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं और दोनों देशों के सामने सहयोग के नए अवसर मौजूद हैं।

‘भारत के साथ और भी बहुत कुछ कर सकते हैं’

रुबियो ने कहा, "भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक मित्र है। हम पहले से कई क्षेत्रों में साथ काम कर रहे हैं और भविष्य में सहयोग की संभावनाएं और भी व्यापक हैं।"

उन्होंने संकेत दिया कि व्यापार समझौते को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है।

कुछ ही हफ्तों में हो सकता है समझौता

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बोलते हुए रुबियो ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि हम जल्द ही इस समझौते को अंतिम रूप दे पाएंगे। संभवतः अगले कुछ हफ्तों में इसकी घोषणा हो सकती है। हम समझौते के काफी करीब पहुंच चुके हैं और दोनों पक्ष इसे पूरा करना चाहते हैं।"

व्यापार और निवेश संबंधों पर जोर

इस बीच भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बुधवार को अमेरिकी सहायक व्यापार प्रतिनिधि ब्रेंडन लिंच का स्वागत किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रयासों से भारत और अमेरिका के बीच व्यापार और निवेश संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि रुबियो का ताजा बयान इसी दिशा में बढ़ते सहयोग का संकेत है।

क्वाड बैठक में भी हुई अहम चर्चा

भारत दौरे के दौरान मार्को रुबियो ने क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लिया। उन्होंने बताया कि बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई और सहयोग का दायरा बढ़ाने पर सहमति बनी।

रुबियो ने कहा कि इस वर्ष के अंत में एक और क्वाड बैठक आयोजित करने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है।

गौरतलब है कि क्वाड समूह में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग और सुरक्षा को मजबूत करना इस समूह का प्रमुख उद्देश्य माना जाता है।

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