ईरान युद्ध के बीच भारत से बांग्लादेश को 5,000 टन डीजल की आपूर्ति

‘फ्रेंडशिप पाइपलाइन’ के तहत राहत, बढ़ती ईंधन संकट से निपटने के लिए कदम
ईरान युद्ध के बीच भारत से बांग्लादेश को 5,000 टन डीजल की आपूर्ति
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ईरान में जारी युद्ध के कारण बांग्लादेश में ईंधन संकट गहरा गया है। इस बीच भारत ने बांग्लादेश को 5,000 टन डीजल की आपूर्ति की है। यह आपूर्ति दोनों देशों के बीच चल रही नियमित ऊर्जा व्यापार का हिस्सा है।

बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPC) के अध्यक्ष Muhammad Rezanur Rahman ने बताया कि भारत-बांग्लादेश समझौते के तहत भारत हर साल 1,80,000 टन डीजल बांग्लादेश को पाइपलाइन के जरिए भेजता है। अब तक 5,000 टन का यह पहला बैच है, और आने वाले दो महीनों में छह महीने के कुल आपूर्ति को पूरा करने की उम्मीद है।

डीजल की आपूर्ति Numaligarh Refinery Limited से व्यावसायिक आधार पर की जा रही है, जो 2017 में शुरू हुई ‘India-Bangladesh Friendship Pipeline’ पहल के तहत आता है।

हालांकि बांग्लादेश ने अतिरिक्त आपूर्ति की मांग की है, भारत ने अभी तक अतिरिक्त 5,000 टन डीजल देने का निर्णय नहीं लिया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्धता और बाजार की स्थिति के आधार पर तय की जाएगी।

बांग्लादेश ने ईंधन संकट के कारण सार्वजनिक और निजी विश्वविद्यालय बंद कर दिए हैं और ईंधन बिक्री पर दैनिक कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। इससे पहले ईंधन स्टेशनों पर पैनिक खरीदारी देखी गई थी।

संयुक्त राज्य अमेरिका ने मंगलवार को 16 ईरानी माइन-लेयर जहाजों को नष्ट करने की घोषणा की थी, जबकि ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में तेल निर्यात रोकने की धमकी दी। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि अगर ईरान ने माइन हटाने में असफल रहा तो उसे अभूतपूर्व स्तर पर सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

युद्ध के 11वें दिन अमेरिका और ईरान दोनों ने कड़े रुख अपनाए। अमेरिकी रक्षा सचिव Pete Hegseth ने सबसे तीव्र हमलों का आश्वासन दिया, जबकि ईरान ने बातचीत से इनकार करते हुए ट्रंप और इजराइल तथा खाड़ी देशों पर नए हमलों की धमकी दी।

इस संघर्ष के असर ने मध्य पूर्व और उससे परे के ऊर्जा बाजार और सुरक्षा परिस्थितियों में भी गंभीर तनाव पैदा किया है।

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