ईरान के शोक में शामिल हुआ भारत

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री को फोन कर भारत की तरफ से अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर संवेदना जतायी तो वहीं विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने ईरानी राजदूत को नयी दिल्ली की ओर से संवेदना संदेश दिया।
नई दिल्ली स्थित ईरान दूतावास जाकर विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने भारत की तरफ से शोक संवेदना लिखी।
नई दिल्ली स्थित ईरान दूतावास जाकर विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने भारत की तरफ से शोक संवेदना लिखी।
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नई दिल्लीः भारत ने बृहस्पतिवार को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर शोक व्यक्त किया। भारत की तरफ से दो स्तरों पर ईरान के प्रति हमदर्दी जतायी गयी है।

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री को फोन कर भारत की तरफ खामनेई की मौत पर संवेदना जतायी तो वहीं विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने ईरानी राजदूत को नयी दिल्ली की ओर से संवेदना संदेश दिया। मिसरी ने ईरानी दूतावास का दौरा किया और भारत सरकार की ओर से शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आज दोपहर अपने ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची से फ़ोन पर बात की। उन्होंने X पर एक पोस्ट में कहा, "आज दोपहर ईरानी FM सैयद अब्बास अराघची के साथ टेलीकॉन हुआ।" जयशंकर का ईरानी विदेश मंत्री को फोन करना काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार भारत की तरफ से सीधे ईरानी नेता से बातचीत हुई है।

इधर विदेश मंत्रालय (एमईए) ने विदेश सचिव और भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली के बीच हुई बातचीत की तस्वीर भी जारी की। खामेनेई की मौत 28 फरवरी को इजराइल और अमेरिका के हमले में हुई थी। भारत ने हालांकि पश्चिम एशिया संकट के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति का आह्वान किया, लेकिन उसने खामेनेई की हत्या पर प्रतिक्रिया न देने का विकल्प चुना।

नई दिल्ली स्थित ईरान दूतावास जाकर विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने भारत की तरफ से शोक संवेदना लिखी।
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मिसरी की ईरानी दूतावास यात्रा और शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर करना इसलिए महत्वपूर्ण हो गया क्योंकि कई विपक्षी दलों ने खामेनेई की मृत्यु पर सरकार की निष्क्रियता की आलोचना की थी। हालांकि मंगलवार को, भारत ने ईरान-अमेरिका विवाद को जल्दी खत्म करने के लिए बातचीत और कूटनीतिक बातचीत की अपील की थी। साथ ही, पश्चिम एशिया में रहने वाले करीब एक करोड़ भारतीयों के हितों को सुरक्षित करने और देश की अर्थव्यवस्था पर संभावित “गंभीर नतीजों” वाले व्यापार और एनर्जी सप्लाई चेन में रुकावटों को रोकने की जरूरत पर जोक दिया था।

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