

श्री विजयपुरमः हिंदी महासागर में चीन के बढ़ते दखल पर नजर रखने के लिए भारत भी अपनी पहुंच और शक्ति को बढ़ाने में लगा है। खासकर भारत अंडमान-निकोबार द्वीप समूह को केंद्र कर अपनी सैन्य ताकत को बढ़ा रहा है। इससे भारत को हिंद महासागर में चीन तथा अन्य शक्तियों पर नजर रखने में काफी मदद मिलेगी और युद्ध की परिस्थियों में यहां बढ़त भी बनायी जा सकती है। इसके साथ ही भारत अपने व्यावसायिक जहाजों को सुरक्षा भी प्रदान कर सकता है।
प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने शुक्रवार को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भारतीय वायु सेना के कार निकोबार वायुसेना अड्डे पर पुन:निर्मित एवं उन्नत हवाई पट्टी का उद्घाटन किया। सीडीएस सुबह करीब साढ़े 11 बजे कार निकोबार द्वीप पहुंचे, जहां अंडमान और निकोबार कमान (एएनसी) के कमांडर-इन-चीफ वाइस एडमिरल अजय कोचर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया।
अधिकारी ने बताया कि कार निकोबार वायुसेना अड्डे पर हवाई पट्टी के उन्नयन का कार्य पूरा कर लिया गया है। श्री विजयपुरम से लगभग 535 किलोमीटर दूर स्थित निकोबार जिले का कार निकोबार द्वीप 2004 की सुनामी के दौरान सबसे अधिक प्रभावित हुआ था।
मलक्का जलडमरूमध्य पर सीधी नजर
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘उन्नत हवाई पट्टी पूर्वी मोर्चे को और अधिक मजबूती देगी, क्योंकि इससे मलक्का जलडमरूमध्य पर सीधी रणनीतिक निगरानी की जा सकेगी। मलक्का जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार और जहाजों के माध्यम से ऊर्जा से जुड़ी आपूर्ति के लिए एक प्रमुख वैश्विक समुद्री मार्ग है। इससे भारतीय वायु सेना की त्वरित हवाई अभियान शुरू करने की क्षमता में भी वृद्धि होगी।’’
उन्होंने बताया कि विमानों की सुचारू आवाजाही के लिए हवाई पट्टी का विस्तार किया गया है और यह सुविधा भारतीय वायु सेना को ‘लॉन्ग रेंज फायरिंग अभ्यासों’ में भी मदद करेगी।
‘एक्ट ईस्ट’ नीति पर ध्यान
कमान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सीडीएस की यह यात्रा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के रणनीतिक महत्व, ‘एक्ट ईस्ट’ नीति पर ध्यान केंद्रित होने और क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा एवं विकास के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को रेखांकित करती है।
उन्होंने बताया कि सीडीएस एक भंडारण सुविधा का भी उद्घाटन करेंगे और सुनामी स्मारक का दौरा भी करेंगे।