

भारत सरकार ने उन रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें दावा किया गया था कि अमेरिका ईरान पर हमले करने के लिए भारतीय बंदरगाहों का उपयोग कर रहा है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने इन दावों को “फर्जी और भ्रामक” बताते हुए कहा कि इस प्रकार की बातें निराधार हैं और लोगों को ऐसी अफवाहों से सावधान रहना चाहिए।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिका के पूर्व सेना अधिकारी डगलस मैकग्रेगर ने एक अमेरिकी चैनल ‘वन अमेरिका न्यूज़ नेटवर्क’ को दिए गए एक साक्षात्कार में कहा कि अमेरिका के कई सैन्य अड्डे और बंदरगाह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, इसलिए अमेरिकी नौसेना को भारत और भारतीय बंदरगाहों का सहारा लेना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नौसेना फिलहाल भारत के बंदरगाहों का इस्तेमाल कर रही है, जो उनके अनुसार आदर्श स्थिति नहीं है।
इस बयान के बाद भारत के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक फैक्ट-चेक अकाउंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि यह दावा पूरी तरह से गलत है। मंत्रालय ने कहा कि इस प्रकार के आधारहीन और मनगढ़ंत बयान लोगों को गुमराह करते हैं और इन्हें गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए। भारत ने साथ ही मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता भी व्यक्त की है। सरकार ने सभी पक्षों से संयम बरतने, स्थिति को और अधिक न बढ़ाने तथा आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की है।
दरअसल, मध्य पूर्व में हालात तब बेहद तनावपूर्ण हो गए जब अमेरिका और इज़राइल ने मिलकर ईरान पर संयुक्त सैन्य हमले किए। इन हमलों में ईरान के 86 वर्षीय सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो गई। ईरान ने इस हमले के जवाब में इज़राइल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइल हमले किए। इसके अलावा मंगलवार रात हिंद महासागर में एक अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा दागे गए टॉरपीडो से ईरान का युद्धपोत “आईआरआईएस डेना” डूब गया। इस हमले में 87 लोगों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि यह युद्धपोत भारत की मैत्रीपूर्ण यात्रा पर था जब उस पर हमला किया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार है जब किसी अमेरिकी पनडुब्बी ने किसी सतही युद्धपोत पर हमला किया है। इस युद्ध को अब छह दिन हो चुके हैं और हालात शांत होने के कोई संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार अब तक ईरान में एक हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि इज़राइल में लगभग एक दर्जन लोग मारे गए हैं। इसके अलावा कम से कम छह अमेरिकी सैनिकों की भी इस संघर्ष में जान जा चुकी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इन हमलों का बचाव करते हुए कहा है कि ईरान से उन्हें तत्काल खतरा था। ट्रंप ने कहा कि अगर उन्होंने पहले हमला नहीं किया होता तो ईरान इज़राइल पर हमला कर सकता था और संभवतः अमेरिका को भी निशाना बना सकता था। कुल मिलाकर यह संघर्ष वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बन गया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय शांति तथा कूटनीतिक समाधान की उम्मीद कर रहा है।