साल के आखिरी मुकाबले में हिंदी फिल्मों से पिछड़ीं बंगाली फिल्में

साल के आखिरी मुकाबले में हिंदी फिल्मों से पिछड़ीं बंगाली फिल्में
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सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : साल 2025 के आखिरी हफ्तों में बॉक्स ऑफिस पर बंगाली फिल्मों का प्रदर्शन हिंदी फिल्मों के सामने कमजोर साबित हुआ। पूजा और क्रिसमस जैसे बड़े फेस्टिव सीजन के बावजूद टॉलीवुड उम्मीद के मुताबिक कमाई नहीं कर सका। इस बीच, सोशल मीडिया ट्रोलिंग और फिल्म बिजनेस को नुकसान पहुंचाने के आरोपों ने इंडस्ट्री के भीतर नई बहस छेड़ दी है।

ट्रोलिंग के खिलाफ पुलिस कमिश्नर से मिलने की तैयारी

टॉलीवुड के कई स्टेकहोल्डर्स ने मंगलवार को पुलिस कमिश्नर से मिलने का समय मांगा है। उनका आरोप है कि सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल कर संगठित तरीके से फिल्मों को निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि, इंडस्ट्री के एक वर्ग का मानना है कि कहीं यह चर्चा समकालीन बंगाली फिल्मों की क्वालिटी पर सवालों से ध्यान हटाने की कोशिश तो नहीं है।

सरकारी पहल के बावजूद कमजोर रहा कारोबार

राज्य सरकार द्वारा बंगाली फिल्मों के लिए प्राइम-टाइम शो रिज़र्व करने और स्क्रीनिंग पैनल बनाने जैसे कदमों के बावजूद हालात में खास सुधार नहीं दिखा।
पूजा पर रिलीज़ हुई फिल्में— ‘रघु डाकू’, ‘रक्तबीज 2’, ‘देवी चौधरानी’ और ‘जितो कांडो कोलकातातेई’— बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित नहीं हो सकीं।
वहीं, क्रिसमस पर रिलीज ‘प्रजापति 2’, ‘लहो गौरांगेर नाम रे’ और ‘मितिन: एकटी खुनीर संधाने’ हिंदी फिल्म ‘धुरंधर’ के सामने टिक नहीं पाईं, जो 5 दिसंबर को रिलीज़ होने के बावजूद दर्शकों को खींचती रही।

बॉक्स ऑफिस आंकड़ों को लेकर भ्रम

प्रोड्यूसर राणा सरकार ने बंगाली फिल्मों की कमाई को लेकर फैल रही गलत जानकारी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा,
“बंगाल में एक फिल्म अधिकतम एक हफ्ते में लगभग 3 करोड़ रुपये का ग्रॉस बिज़नेस कर सकती है, लेकिन कई बार पीआर एजेंसियां बढ़ा-चढ़ाकर या फर्जी आंकड़े पेश करती हैं।”
उन्होंने यह भी बताया कि एक बंगाली मूवी चैनल छह महीने में बंद हो रहा है और दूसरे चैनलों ने बंगाली फिल्में खरीदना कम कर दिया है।

OTT और सैटेलाइट मार्केट भी ठंडा

3–4 करोड़ रुपये में बनी कई बंगाली फिल्में OTT और सैटेलाइट खरीदार नहीं ढूंढ पा रही हैं। वजह यह है कि टेलीकास्ट के बाद विज्ञापन से लागत वसूलने की उम्मीद कम हो गई है।

बेकाबू फैन क्लब और ऑनलाइन हेरफेर

टॉलीवुड को पिछले कुछ समय से ऑनलाइन और ऑफलाइन फैन क्लबों की आक्रामक गतिविधियों का सामना करना पड़ रहा है। अश्लील ट्रोलिंग, स्टार किड्स को धमकियां, महिलाओं पर निजी हमले और टिकट काउंटरों पर हंगामा जैसी शिकायतें सामने आई हैं। ऑनलाइन टिकटिंग प्लेटफॉर्म पर नकारात्मक रेटिंग के जरिए हेरफेर के आरोप भी लगाए गए हैं।

खुद की कमियों पर भी जरूरी है नजर

इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि खराब प्रदर्शन के लिए सिर्फ ट्रोलर्स को दोष देना सही नहीं होगा। कम समय में फिल्में पूरी करने, कमजोर स्क्रीनप्ले और इंडस्ट्री के भीतर बढ़ते ईगो क्लैश भी बड़ी वजहें हैं। एक अंदरूनी सूत्र ने कहा कि “अब आत्ममंथन का समय है। जब तक क्वालिटी और सिस्टम पर ध्यान नहीं दिया जाएगा, हालात नहीं बदलेंगे।”

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