संदेशखाली में नये वर्ष पर पूरी होगी सालों की मांग

मुख्यमंत्री की घोषणा अनुसार स्थायी पुल को हो रहा निर्माण
In Sandeshkhali, a long-standing demand will be fulfilled on New Year's Day.
फाइल फोटो REP
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निधि, सन्मार्ग संवाददाता

बशीरहाट : पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के अंतर्गत आने वाले संदेशखाली क्षेत्र के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के वादे को निभाते हुए राज्य सरकार ने इलाके की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। संदेशखाली ब्लॉक नंबर 2 के बेड़मजूर 1 और 2 ग्राम पंचायत को जोड़ने वाली 'धुलिया खाल' पर एक आधुनिक स्टील ब्रिज (इस्पात सेतु) के निर्माण का कार्य आधिकारिक रूप से शुरू हो गया है।

परियोजना की लागत और निर्माण का विवरण

प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, इस पुल के निर्माण पर कुल 3 करोड़ 91 लाख 29 हजार रुपये की लागत आएगी। लगभग 20 मीटर लंबा यह स्टील ब्रिज मजबूती और टिकाऊपन को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इस पुल के तैयार हो जाने से संदेशखाली की भौगोलिक दूरियां कम होंगी और परिवहन व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आएगा। यह परियोजना मुख्यमंत्री की उस प्रतिबद्धता का हिस्सा है, जिसमें उन्होंने संदेशखाली के बुनियादी ढांचे को सुधारने का आश्वासन दिया था।

प्रशासनिक सक्रियता और शिलान्यास समारोह

पुल निर्माण कार्य का औपचारिक उद्घाटन यानी शिलान्यास बशीरहाट पुलिस जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) डॉ. हुसैन मेहंदी रहमान द्वारा किया गया। इस गौरवशाली क्षण के दौरान मीनाखां के अनुमंडल पुलिस अधिकारी कौशिक बसाक और संदेशखाली ब्लॉक 2 के खंड विकास अधिकारी (BDO) अरुण कुमार सामंत सहित कई अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता और समय सीमा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि स्थानीय लोगों को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके।

स्थानीय महिलाओं की भागीदारी और भावनात्मक क्षण

उद्घाटन समारोह में एक अनूठी और भावनात्मक पहल देखी गई। स्थानीय निवासियों और विशेषकर महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए, क्षेत्र की महिलाओं के हाथों से ही नारियल फुड़वाकर काम की शुरुआत कराई गई। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक बुनियादी ढांचे का निर्माण नहीं है, बल्कि उनके सम्मान और जरूरतों की जीत है। मुख्यमंत्री के इस फैसले से पूरे बेड़मजूर इलाके में खुशी की लहर है।

क्यों जरूरी था यह पुल? ग्रामीणों की समस्याएं

धुलिया खाल पर पुल न होने के कारण बेड़मजूर 1 और 2 के निवासियों को दशकों से नारकीय जीवन जीना पड़ रहा था। पुल के अभाव में निम्नलिखित समस्याएं प्रमुख थीं:

  • शिक्षा में बाधा: मानसून के दौरान नहर का जलस्तर बढ़ने पर स्कूली छात्र-छात्राओं का स्कूल जाना बंद हो जाता था या उन्हें जान जोखिम में डालकर छोटी नावों का सहारा लेना पड़ता था।

  • स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव: किसी आपातकालीन स्थिति में मरीज को अस्पताल ले जाना एक बड़ी चुनौती थी। एम्बुलेंस का गांव तक पहुंचना नामुमकिन था।

  • व्यापार और कृषि: स्थानीय किसानों को अपनी उपज बाजार तक ले जाने में काफी खर्च और समय लगता था। नया पुल बनने से व्यापार और वाणिज्य को नई गति मिलेगी।

निष्कर्ष और भविष्य की उम्मीदें

प्रशासन ने लक्ष्य रखा है कि इस पुल का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर पूरा किया जाए। मुख्यमंत्री की इस पहल से न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि यह संदेशखाली के समग्र विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा। स्थानीय निवासियों को उम्मीद है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक समृद्धि के क्षेत्र में अब यह क्षेत्र पिछड़ा नहीं रहेगा।

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