

मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : छुट्टियों में शिक्षकों से जनगणना कराने के स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देश ने सियासी और प्रशासनिक हलचल बढ़ा दी है। सोमवार को जारी इस नोटिफिकेशन के मुताबिक पढ़ाई को नुकसान से बचाने के लिए शिक्षक स्कूल के बाद या वीकेंड की छुट्टियों में घर-घर जाकर जनगणना का काम कर सकते हैं। इस आदेश के बाद से शिक्षकों का एक वर्ग बुरी तरह भड़क गया है। उनका तर्क है कि जनगणना का काम 'ऑन ड्यूटी' माना जाना चाहिए और स्कूल समय के बाद यह संभव नहीं है। शिक्षकों की मुख्य शिकायत है कि कई स्कूलों में 90% से ज्यादा शिक्षकों को इस काम में झोंक दिया गया है, जिससे शिक्षण कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
शिक्षकों की ड्यूटी पर सरकार के फैसले से नाराजगी
जनगणना कर्मचारी व बंगाल टीचर्स एंड एजुकेशन वर्कर्स एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी स्वपन मंडल ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अपना रुख नहीं बदला, तो कर्मचारी इस काम का पूरी तरह बॉयकॉट करेंगे। वहीं, शिक्षानुरागी ओइक्या मंच के किंकर अधिकारी ने भी इसे जबरन थोपा गया फैसला बताते हुए नोटिफिकेशन वापस लेने और कार्यदिवसों में ड्यूटी देने की मांग की है। इसके उलट, बीजेपी टीचर्स सेल के को-कन्वेनर ने इस फैसले का खुलकर समर्थन किया है। उनका कहना है कि छात्रों की पढ़ाई का नुकसान न हो, इसलिए यदि जरूरत पड़े तो सुबह के समय स्कूल संचालित किए जाएं, लेकिन जनगणना कार्य में शामिल शिक्षकों को स्कूल समय में छूट मिलनी चाहिए। शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन पहले ही कह चुके हैं कि सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि इस काम में कम से कम शिक्षकों को लगाया जाए, लेकिन इस नए नोटिफिकेशन ने विवाद को और बढ़ा दिया है।