होर्मुज बंद तो भारत में हाहाकार! पेट्रोल ₹150 और महंगाई 5% पार जाने का खतरा

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच CTI की चेतावनी, तेल सप्लाई प्रभावित हुई तो बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल, हवाई टिकट और रोजमर्रा की चीजों के दाम
होर्मुज बंद तो भारत में हाहाकार! पेट्रोल ₹150 और महंगाई 5% पार जाने का खतरा
Published on

नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद किए जाने की खबरों के बीच भारत में संभावित ऊर्जा संकट को लेकर चिंता बढ़ गई है। व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहा तो भारत समेत दुनिया के कई देशों को गंभीर आर्थिक और ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है।

CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। इस मार्ग के बाधित होने से कच्चे तेल की उपलब्धता प्रभावित होगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ा उछाल संभव

CTI के अनुसार, यदि संकट लंबा खिंचता है तो कच्चे तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। इसका सीधा असर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ेगा। अनुमान है कि पेट्रोल 140-150 रुपये प्रति लीटर और डीजल 130 रुपये प्रति लीटर के पार जा सकता है।

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे देशों से आयात करता है। इन देशों से आने वाला अधिकांश तेल होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते ही भारत पहुंचता है।

महंगाई दर 5% से ऊपर जा सकती है

CTI महासचिव रमेश आहूजा और वरिष्ठ उपाध्यक्ष दीपक गर्ग ने बताया कि मार्च-अप्रैल 2026 में भारत की खुदरा महंगाई दर 3.4 प्रतिशत रही थी। लेकिन यदि तेल संकट गहराता है तो महंगाई दर 5 प्रतिशत से ऊपर पहुंच सकती है।

तेल की कीमतें बढ़ने से परिवहन, विनिर्माण, खाद्य पदार्थ, गैस, बिजली और अन्य आवश्यक सेवाओं की लागत बढ़ेगी, जिसका असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।

किन सेक्टरों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?

विशेषज्ञों के अनुसार, संकट का सबसे ज्यादा असर एविएशन, शिपिंग, उर्वरक, ऑटोमोबाइल, पेंट, टायर और प्लास्टिक उद्योग पर पड़ सकता है।

  • हवाई ईंधन महंगा होने से विमान टिकटों की कीमत 40-50% तक बढ़ सकती है।

  • शिपिंग लागत 200-300% तक बढ़ने की आशंका है।

  • उर्वरकों की कीमत बढ़ने से खेती की लागत बढ़ सकती है।

  • परिवहन महंगा होने से रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम भी बढ़ सकते हैं।

भारत के पास कितनी तैयारी?

भारत के पास लगभग 74 दिनों की तेल आवश्यकता के बराबर रणनीतिक भंडार मौजूद है। इसके अलावा रूस से भी बड़ी मात्रा में तेल आयात किया जा रहा है, जो होर्मुज मार्ग पर निर्भर नहीं है।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि संकट लंबे समय तक बना रहा तो वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों से तेल लाना अधिक महंगा और समय लेने वाला होगा। अमेरिका, ब्राजील और गुयाना जैसे देशों से तेल आयात संभव है, लेकिन वहां से आपूर्ति आने में 40 दिन तक लग सकते हैं।

व्यापार जगत में बढ़ी चिंता

CTI का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी लंबे व्यवधान का असर केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक विकास पर भी पड़ेगा। ऐसे में भारत समेत दुनिया के कई देश हालात पर करीब से नजर बनाए हुए हैं।

Google पर संवाद सर्च बनाएं →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in