किराये में भारी वृद्धि हुई है तो हवाई यात्रा न करें : कोर्ट की याची को सलाह

कोर्ट का हवाई किराये में 700% वृद्धि के दावे वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार
Kolkata
याची की दलील : अनुच्छेद 14 का उल्लंघन
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नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने हवाई किराये में करीब 700 प्रतिशत की वृद्धि का आरोप लगाने वाली एक याचिका पर सोमवार को तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए याची से कहा कि वह हवाई यात्रा न करे।

याची की दलील : अनुच्छेद 14 का उल्लंघन

एक अधिवक्ता ने न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अगुवाई वाले पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया। अधिवक्ता ने कहा कि हवाई किराये में 700 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

इस पर पीठ ने हवाई यात्रा न करने की सलाह दी जिसके जवाब में अधिवक्ता ने कहा कि हवाई यात्रा एक आवश्यक सेवा है और किराये में इस तरह की वृद्धि संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। संविधान का अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता से संबंधित है।

नियामकीय दिशानिर्देश बनाने का अनुरोध

सुप्रीम कोर्ट सामाजिक कार्यकर्ता एस लक्ष्मीनारायणन की ओर से दायर एक अलग याचिका पर पहले से ही सुनवाई कर रहा है। इसमें नागर विमानन क्षेत्र में पारदर्शिता और यात्रियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत एवं स्वतंत्र नियामक की नियुक्ति तथा निजी विमानन कंपनियों द्वारा हवाई किराये और अन्य शुल्कों में होने वाले ‘अनिश्चित उतार-चढ़ाव’ को नियंत्रित करने के लिए नियामकीय दिशानिर्देश बनाने का अनुरोध किया गया है।

इस याचिका पर 16 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान केंद्र ने शीर्ष न्यायालय को बताया था कि भारतीय विमानन क्षेत्र को विनियमित करने के उद्देश्य से 2024 के एक कानून के तहत बनाये गये नियमों को प्रशासनिक मंजूरी दे दी गयी है और इन्हें दो सप्ताह के भीतर प्रकाशित किये जाने की संभावना है।

कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से अगली सुनवाई की तारीख 16 नवंबर को भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत प्रकाशित नियमों को अदालत के समक्ष पेश करने को कहा।

इससे पहले 17 अगस्त को केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि उसने देश के विमानन क्षेत्र के आधुनिकीकरण के उद्देश्य से भारतीय वायुयान अधिनियम के तहत नियम बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। पिछले साल नवंबर में कोर्ट ने लक्ष्मीनारायणन की याचिका पर केंद्र और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा था।

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