ICC का 18वां वेल्थ एंड कैपिटल मार्केट्स समिट, 8.2% GDP ग्रोथ पर फोकस

भारत की आर्थिक रफ्तार को नई दिशा देने पर मंथन, निवेश, म्यूचुअल फंड और कैपिटल मार्केट्स की भूमिका पर गहन चर्चा
ICC का 18वां वेल्थ एंड कैपिटल मार्केट्स समिट, 8.2% GDP ग्रोथ पर फोकस
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कोलकाता में 23 मई 2026 को इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) द्वारा 18वां वेल्थ एंड कैपिटल मार्केट्स समिट आयोजित किया गया। इस समिट में देशभर के नीति-निर्माता, रेगुलेटर्स, उद्योग जगत के दिग्गज और वित्तीय विशेषज्ञ शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारत को 8.2% GDP ग्रोथ और 7 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने की रणनीतियों पर चर्चा करना था।

समिट की शुरुआत ICC के नेशनल एक्सपर्ट कमेटी (BFSI) के चेयरमैन अतनु सेन के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने कहा कि भारत इस समय अवसर और आत्मविश्वास के महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आर्थिक विकास के लिए मजबूत पूंजी बाजार, वित्तीय नवाचार और संस्थागत निवेश की भूमिका बेहद अहम है।

SEBI के पूर्णकालिक सदस्य अमरजीत सिंह ने कहा कि कैपिटल मार्केट्स को केवल मुंबई या पश्चिम भारत तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि देश के हर हिस्से तक इसका विस्तार जरूरी है। उन्होंने बताया कि बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए लंबी अवधि की पूंजी और मजबूत वित्तीय ढांचे की आवश्यकता है।

AMFI के CEO वेंकट एन चलसानी ने बताया कि भारत की अर्थव्यवस्था वर्तमान चुनौतियों के बावजूद 7.6% की दर से बढ़ रही है और 8.2% का लक्ष्य हासिल करना संभव है। उन्होंने कहा कि लोगों की बचत अब पारंपरिक तरीकों से हटकर म्यूचुअल फंड और अन्य निवेश विकल्पों की ओर बढ़ रही है, जो आर्थिक मजबूती का संकेत है।

समिट में GIFT सिटी को भारत के उभरते वैश्विक वित्तीय केंद्र के रूप में भी रेखांकित किया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय निवेश और वित्तीय सेवाओं के लिए भारत को एक नया प्लेटफॉर्म प्रदान कर सकता है।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सत्रों में म्यूचुअल फंड, वैकल्पिक निवेश, तकनीकी नवाचार और वैश्विक बाजारों में भारत की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई। कोटक म्यूचुअल फंड के एमडी निलेश शाह ने कहा कि निवेश में अनुशासन, भरोसा और टीमवर्क ही दीर्घकालिक सफलता की कुंजी हैं।

समिट का समापन ICC के महानिदेशक डॉ. राजीव सिंह के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए निवेशकों का भरोसा बनाए रखना सबसे जरूरी है।

यह समिट भारत के वित्तीय भविष्य को लेकर गहन चर्चा का मंच बना, जहां विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि मजबूत पूंजी बाजार और निवेश संस्कृति ही देश को वैश्विक आर्थिक शक्ति बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

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