

नई दिल्ली: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने निर्वासन के दौरान बड़ा बयान देते हुए दावा किया है कि वह इसी साल अपने देश वापस लौटेंगी। उन्होंने कहा कि उनकी वापसी किसी व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा से नहीं, बल्कि बांग्लादेश में लोकतंत्र, कानून के शासन और लोगों के राजनीतिक अधिकारों की बहाली से जुड़ी है।
एक विशेष ईमेल इंटरव्यू में शेख हसीना ने अपने खिलाफ आए फैसले, अवामी लीग पर प्रतिबंध, अंतरिम सरकार, बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और भारत में अपने जीवन को लेकर कई बातें रखीं।
शेख हसीना ने अपने खिलाफ आए फैसले को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था का इस्तेमाल उनकी पार्टी अवामी लीग को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “मुझे मौत का डर नहीं है। मैंने 1975 में अपने परिवार को खोया, मुझ पर हमले हुए, लेकिन हर चुनौती का सामना किया। मैं इस साल हर बाधा को पार करते हुए अपने देश लौटूंगी।”
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि अवामी लीग कोई कमजोर संगठन नहीं है, बल्कि यह 77 वर्षों से बांग्लादेश की जनता और इतिहास से जुड़ी हुई पार्टी है।
उन्होंने दावा किया कि पार्टी पर पहले भी कई बार प्रतिबंध लगे, नेताओं को निशाना बनाया गया, लेकिन हर बार अवामी लीग पहले से मजबूत होकर वापस आई। उनके मुताबिक, किसी भी सरकार के फैसले से पार्टी को लोगों के समर्थन से अलग नहीं किया जा सकता।
शेख हसीना ने अंतरिम सरकार और वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि बांग्लादेश में लोकतंत्र, कानून व्यवस्था और लोगों की सुरक्षा कमजोर हुई है।
उन्होंने दावा किया कि देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है, कट्टरपंथ बढ़ रहा है और अवामी लीग के नेताओं व कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है।
शेख हसीना ने आरोप लगाया कि 5 अगस्त के बाद देश में मुक्ति संग्राम की भावना को कमजोर करने की कोशिश हुई। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान किया गया और ऐतिहासिक प्रतीकों को नुकसान पहुंचाया गया।
उन्होंने मंदिरों, सूफी दरगाहों और सांस्कृतिक संस्थानों पर हमलों का भी जिक्र किया और दावा किया कि देश में धार्मिक और सामाजिक असुरक्षा बढ़ी है।
पूर्व प्रधानमंत्री ने अपने कार्यकाल की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में बांग्लादेश ने आर्थिक और सामाजिक विकास में बड़ी प्रगति की।
उन्होंने दावा किया कि बिजली पहुंच, बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट, डिजिटल विकास और आर्थिक वृद्धि के क्षेत्र में देश ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं।
उन्होंने पद्मा ब्रिज, मेट्रो रेल और अन्य परियोजनाओं को अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धियों में शामिल किया।
शेख हसीना ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदू, बौद्ध, ईसाई और अन्य अल्पसंख्यक समुदाय खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक स्थलों पर हमले हुए और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर चिंता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक किसी राजनीतिक समीकरण का हिस्सा नहीं, बल्कि देश के समान अधिकार वाले नागरिक हैं।
भारत में निर्वासन के दौरान अपने जीवन पर बात करते हुए शेख हसीना ने कहा कि उनका जीवन अब पूरी तरह बांग्लादेश के लोगों को समर्पित है।
उन्होंने कहा कि वह दूर रहकर भी देश की राजनीतिक स्थिति पर नजर रखती हैं और लोकतंत्र व मानवाधिकारों की बहाली के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगी।
उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य बांग्लादेश में एक ऐसी व्यवस्था की वापसी है, जहां कानून का शासन और जनता के अधिकार सुरक्षित हों।