

नई ट्रांसफर पॉलिसी पर विवाद, शिक्षकों की कमी और मांग
मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पश्चिम बंगाल की प्रमुख विश्वविद्यालयो सीयू और जेयू में शिक्षकों के भारी खाली पदों और हाल ही में पास हुए ''द यूनिवर्सिटीज एंड कॉलेजेज (एडमिनिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल 2026'' को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार नई और छोटी यूनिवर्सिटीज में पढ़ाई सुचारु करने के लिए पुरानी यूनिवर्सिटीज के शिक्षकों के ट्रांसफर की तैयारी में है। हालांकि, शिक्षक संगठनों और प्रोफेसरों का साफ कहना है कि ट्रांसफर किसी समस्या का समाधान नहीं है, क्योंकि पुरानी यूनिवर्सिटीज खुद शिक्षक कमी की गंभीर समस्या से जूझ रही हैं।
पुरानी यूनिवर्सिटीज में शिक्षकों का गंभीर संकट
जादवपुर यूनिवर्सिटी में करीब 890 स्वीकृत पदों में से 300 से अधिक पद खाली हैं, जबकि कुल मिलाकर लगभग 700 से 1,000 पद बिना स्टाफ के हैं। कलकत्ता यूनिवर्सिटी में भी स्थिति ऐसी ही है, जहां 632 स्वीकृत पदों में से आधे से अधिक खाली पड़े हैं जैसे इतिहास विभाग में 25 स्वीकृत पदों पर केवल 8 शिक्षक ही मौजूद हैं। शिक्षकों का तर्क है कि जब स्टूडेंट्स की संख्या हजारों में है और UGC के अनुपात के अनुसार पहले ही भारी कमी है, तो ऐसे में ट्रांसफर पॉलिसी से शिक्षा की गुणवत्ता और ऑल इंडिया रैंकिंग दोनों पर बुरा असर पड़ेगा।
चेतावनी के बजाय सम्मानजनक सहयोग की अपील
सरकार की चेतावनी और ट्रांसफर नीति से शिक्षकों में नाराजगी है और 16 शिक्षक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि बिल वापस नहीं लिया गया तो वे सड़कों पर उतरेंगे। कलकत्ता यूनिवर्सिटी के एक सीनियर प्रोफेसर के मुताबिक सरकार धमकी देने के बजाय यदि सम्मानपूर्वक अनुरोध करे, तो शिक्षक स्वेच्छा से साल के एक खास समय में नई यूनिवर्सिटीज के छात्रों को पढ़ाने के लिए तैयार हो सकते हैं। टीचर्स की मुख्य मांग यही है कि जबरन ट्रांसफर करने के बजाय सरकार सभी नई और पुरानी यूनिवर्सिटीज में नए पदों पर सीधी नियुक्तियां करे।