

निधि गुप्ता , सन्मार्ग संवाददाता
हावड़ा: कोलकाता के तारातल्ला इलाके में हाल ही में हुए एक निर्माण हादसे के बाद अब हावड़ा शहर में मौजूद जर्जर और क्षतिग्रस्त बस स्टैंडों को लेकर स्थानीय लोगों में भारी चिंता और डर का माहौल है। आगामी कालबैसाखी (तेज आंधी-तूफान और बारिश) के मौसम को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि ये कमजोर ढांचे कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।
यात्रियों को धूप-बारिश से बचाने, शहर की सुंदरता बढ़ाने और सार्वजनिक परिवहन को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से बनाए गए ये बस स्टैंड अब खुद ही राहगीरों के लिए काल बनते नजर आ रहे हैं। हावड़ा कोर्ट, बंकिम सेतु, बाली, बेलूड़, लिलुआ, घुसुड़ी और सलकिया समेत कई प्रमुख इलाकों में स्थित बस स्टैंडों की हालत बेहद शोचनीय हो चुकी है। इनके लोहे के ढांचों में जंग लग चुकी है और छतें टूट-फूट कर गिरने की कगार पर हैं।
हावड़ा सिटी पुलिस के हावड़ा ट्रैफिक गार्ड प्रभारी सुकांत कर्मकार ने इस विषय पर जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस द्वारा कई स्थानों पर जर्जर बस स्टैंडों की शिकायतों को लेकर हावड़ा नगर निगम और संबंधित नगरपालिकाओं को पहले ही लिखित रूप से अवगत कराया जा चुका है।
अधिकारियों के प्रयासों और पुलिस की पहल के बाद जिलाधिकारी (डीएम) कार्यालय, फोरशोर रोड और मैदान क्षेत्र में कुछ नए व सुरक्षित बस स्टैंडों का निर्माण जरूर कराया गया है, लेकिन शहर के अन्य व्यस्त इलाकों में पुराने और क्षतिग्रस्त ढांचे अब भी जस के तस खड़े हैं, जो हर समय खतरे को आमंत्रण दे रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों और दैनिक यात्रियों का कहना है कि प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार किए बिना तुरंत पूरे शहर का सर्वे कराना चाहिए। लोगों ने मांग की है कि खतरनाक स्थिति में पहुंच चुके बस स्टैंडों की या तो तत्काल मरम्मत की जाए या उनका पुनर्निर्माण कराया जाए, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।