

नई दिल्लीः बांग्लादेश के चुनावी नतीजों में नेशनलिस्ट पार्टी ( बीएनपी) को बंपर जीत मिली है और इस जीत के नायक बनकर उभरे हैं पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान। तारिक रहमान लंबे समय बाद पिछले साल ही बांंग्लादेश लौटे थे। अब उनपर देश का भाग्य तय करने की जिम्मेवारी बांग्लादेश की जनता ने सौंपी है।
कौन हैं तारिक रहमान। आइये यहां विस्तार से जानते हैं उनके बारे में। तारिक बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और तीन बार प्रधानमंत्री रहीं बेगम खालिदा जिया के बड़े बेटे हैं। जिया का पिछले साल लंबी बीमारी के बाद मौत हो गई थी।
12 फरवरी को हुए बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में अपनी पार्टी की ऐतिहासिक जीत के बाद, उन्हें बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में देखा जा रहा है। उनकी पार्टी बीएनपी इस चुनाव में 211 सीटें जीत कर बंपर बहुमत प्राप्त किया है। तारिक ने ढाका-17 और बोगरा-6 दोनों सीटों से चुनाव लड़े और दोनों जगहों से जीत हासिल की है।
मां जिया की छाया में राजनीति का पाठ पढ़ा
तारिक रहमान का जन्म 20 नवंबर 1965 को ढाका में हुआ था। उन्होंने ढाका विश्वविद्यालय से अंतरराष्ट्रीय संबंधों की पढ़ाई की, लेकिन बाद में व्यवसाय (कपड़ा और शिपिंग) पर ध्यान केंद्रित करने के लिए पढ़ाई छोड़ दी।
उन्होंने 1988 में बोगरा के गबतली में एक प्राथमिक सदस्य के रूप में राजनीति में कदम रखा।वह लंबे समय तक बीएनपी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और फिर कार्यकारी अध्यक्ष रहे। अपनी मां खालिदा जिया के निधन के बाद, उन्हें 9 जनवरी 2026 को औपचारिक रूप से पार्टी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
भ्रष्टाचार का आरोप और निर्वासन
तारिक अनवर भ्रष्टाचार और अन्य आरोपों के कारण वह लगभग 17 वर्षों तक लंदन में आत्म-निर्वासन में रहे। वह 25 दिसंबर 2025 को बांग्लादेश वापस लौटे तो उनका भव्य स्वागत किया गया।
2001-2006 के दौरान अपनी मां के शासनकाल में उन्हें "डार्क प्रिंस" कहा जाता था और वह 'हवा भवन' से एक समानांतर सरकार चलाने के लिए चर्चित थे। उन पर 2004 के ग्रेनेड हमले की साजिश रचने और भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे थे। हालांकि, 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद, उच्च न्यायालयों ने उनके खिलाफ कई सजाओं को रद्द कर दिया, जिससे उनकी वापसी का रास्ता साफ हुआ।
भारत से रिश्ते सुधारना बड़ी चुनौती
उनकी जीत पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राजदूत जैसे अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने उन्हें बधाई दी है, जिससे उनके नेतृत्व में एक समावेशी बांग्लादेश की उम्मीद जताई गई है। उम्मीद की जाती है कि अगले कुछ दिन के अंदर ही वह बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले लेंगे। उनकी सबसे बड़ी चुनौती भारत के साथ संबंधों को सुधारने की होगी जो निवर्तमान यूनुस सरकार की विद्वेषपूर्ण नीतियों की वजह से निचले स्तर चल गई है। देश की अर्थव्यवस्था को सुधारना भी बड़ी चुनौती है।