हिंदी और सोशल मीडिया कैसे बने एक दूसरे के पूरक

फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन जैसे सोशल मीडिया के जरिये लोगों बड़े स्तर पर हिंदी में अपनी भावनाओं-विचारों को अभिव्यक्त कर रहे हैं।
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कुछ व्यक्ति हिंदी बोल कर हिंदी को गरिमा प्रदान करते हैं।

मैं उन सौभाग्यशाली व्यक्तियों में से एक हूं, जिसे हिंदी ने गरिमा प्रदान की।

-आशुतोष राणा, फिल्म कलाकार

अरुणाचल में 50 से ज्यादा जनजातियां हैं और सबकी अपनी अलग भाषाएं हैं। ऐसे में जब हम एक-दूसरे की भाषा समझ नहीं पाते तो हिंदी ही हमें जोड़ती है।

चुम दरांग, अभिनेत्री, अरुणाचल प्रदेश

अच्छी वाली अंग्रेजी न आती हो

तो खतरनाक वाल हिंदी सीख लो

ज्ञानी उतने ही लगोगो।

विवेक शुक्ल

ये एक्स पर लिखे पोस्ट हैं। यह एक उदाहरण है कि लोगों कैसे हिंदी में अपनी बातें रख रहे हैं। दरअसल अपनी भावनाओं, अपने विचारों को सार्वजनिक मंचों पर लिखकर प्रकट करने की इच्छा रखने वालों को फेसबुक, एक्स व लिंक्डइन जैसे सोशल मीडिया ने एक बड़ा मंच प्रदान किया है। अभिव्यक्ति का माध्यम हिंदी भाषा बन रही है। जिनकी शिक्षा हिंदी में हुई है, वे तो हिंदी में लिख ही रहे हैं, लेकिन अंग्रेजीदां लोग भी आज हिंदी में अपने को अभिव्यक्त रहे हैं। दरअसल बड़े स्तर पर हिंदी भाषी लोगों तक पहुंच की इच्छा ने ऐसे लोगों को इस ओर प्रेरित किया है। अंग्रेजी में उच्च शिक्षित तबका, जो हिंदी में असहज था, शर्मिंदा महसूस करता रहा है, दरअसल आज बाजारवाद ने जिस तरह से हिंदी को अपनाया है, वे लोग भी आज धड़ल्ले से सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों के जरिये हिंदी में लिख रहे हैं, बोल रहे।

हिंदी तीसरी सबसे बड़ी भाषा

पिछले साल की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत समेत दुनिया में एक 61 करोड़ से अधिक लोग हिंदी बोलते हैं, जानते हैं। लेकिन यह आंकड़ा वास्तव में 75 करोड़ तक हो सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक दुनिया में अंग्रेजी और चीन की मंदारिन भाषा के बाद सबसे अधिक हिंदी बोली जाती है। और यही कारण है कि आज गूगल ( यूट्यूब), मेटा ( इंस्टाग्राम, फेसबुक व व्हाट्सऐप) और लिंक्डइन जैसी प्रोद्योगिकी और सोशल मीडिया कंपनियां हिंदी को प्रमुखता दे रही हैं। अधिक से अधिक हिंदी यूजर तक पहुंच बनाने के लिए ये अमेरिकी कंपनियां नित्य अपने उत्पादों को हिंदी में पेश कर रही हैं।

50 करोड़ सोशल मीडिया उपयोगकर्ता

सोशल मीडिया विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह से भारत में संचार क्रांति का दौर जारी है, उससे कुछ सालों में भारत में सबसे अधिक सोशल मीडिया उपभोक्ता हो जाएंगे। 2025 के आखिर में एक स्टडी के मुताबिक भारत में कुल 50 करोड़ लोग हैं जो विभिन्न सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं। यानी भारत की करीब 34 फीसदी आबादी सोशल मीडिया का उपयोग कर रही है। इनमें 64.4 फीसदी पुरुष हैं जबकि 35.6 प्रतिशत महिलाएं हैं। स्टडी बताती है कि 2024 से 2025 के बीच सोशल मीडिया उपयोग करने वालों की संख्या 90 लाख बढ़ी है।

किस पर कितने लोग

भारत में सबसे अधिक लोग इंस्टाग्राम उपयोग करते हैं। इस्टाग्राम के 481 मिलियन उपयोगकर्ता हैं जबिक यूट्यूब के उपयोगकर्ता 462 मिलियन लोग हैं। तीसरे नंबर पर फेसबुक आता है जिसका उपयोग 403 मिलियन लोग करते हैं। व्हाट्सऐप हालांकि एक मैसेजिंग ऐप है लेकिन उसे भी सोशल मीडिया ही माना जाता है। भारत में इसके उपयोगकर्ताओं की संख्या 488 मिलियन है। लिंक्डइन उपयोगकर्ताओं की संख्या 169.5 मिलियन है।

इंटरनेट यूजर एक अरब पार

भारत में तेजी से इंटरनेट प्रयोग करनेवाले लोगों की संख्या बढ़ रही है। 2025 के आखिर तक भारत में इंटरनेट यूजर्स की संख्या एक अरब के पार पहुंच गयी है। लेकिन भारत में इंटरनेट यूजर्स अधिकांश शहरी क्षेत्र में रहते हैं। पिछले एक साल में अलबत्ता ग्रामीण क्षेत्र में 55 फीसदी की दर से इंटरनेट उपभोग्ताओं की संख्या बढ़ी है। ज्यादा लोगों तक इंटरनेट की पहुंच यानी ज्यादा लोग द्वारा सोशल मीडिया का उपयोग। ऐसे में हिंदी उपयोगकर्ताओं की संख्या भी बढ़ेगी।

एक दूसरे के पूरक

एक समय था जब लोग कविता लिखते थे, लेकिन वे अखबारों-पत्रिकाओं में प्रकाशित नहीं करा पाते थे। लेकिन अब फेसबुक-एक्स जैसे सोशल मीडिया ने उन्हें वह मंच प्रदान किया है। इसलिए लोग आज अपनी मातृ भाषा हिंदी में कविता से लेकर यात्रा संस्मरण तक लिख रहे हैं। एक्स पर मूलतः त्वरित टिप्पणी करते हैं। सोशल मीडिया विशेषज्ञों का कहना है कि फेसबुक और एक्स ने हिंदी के विस्तार में बड़ी भूमिका निभाई है। इसे इन शब्दों में कह सकते हैं कि सोशल मीडिया के पंख पर सवारी कर हिंदी ने अपने को दूर तक पहुंचाया है। कोई यह भी कह सकता है कि हिंदी के जरिये सोशल मीडिया ने अपनी पहुंची बड़ी आबादी तक बनायी है। दरअसल आज विकास को आतुर हिंदी और सोशल मीडिया दोनों एक दूसरे के पूरक हो गए हैं।

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