भोजशाला पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: मंदिर घोषित

Madhya Pradesh High Court ने कहा—सरस्वती मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र था स्थल, मुस्लिम पक्ष को अलग जमीन लेने की सलाह
भोजशाला पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: मंदिर घोषित
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धार : मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला- कमाल मौला मस्जिद विवाद पर बड़ा फैसला सुनाते हुए Madhya Pradesh High Court ने इसे देवी सरस्वती का मंदिर माना है। कोर्ट ने हिंदू पक्ष के दावों को स्वीकार करते हुए कहा कि यह स्थान प्राचीन समय में संस्कृत शिक्षा का केंद्र और मंदिर रहा है।

जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि इस स्थल पर हिंदू पूजा की परंपरा कभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई। ऐतिहासिक साक्ष्य भी यह दर्शाते हैं कि यह स्थान परमार वंश के राजा भोज से जुड़ा एक महत्वपूर्ण केंद्र था।

कोर्ट ने मुस्लिम समुदाय को सुझाव दिया कि वे मस्जिद निर्माण के लिए राज्य सरकार से अलग जमीन की मांग करें। साथ ही, इस पूरे परिसर के संरक्षण और देखरेख की जिम्मेदारी Archaeological Survey of India (ASI) को सौंपी गई है।

फैसले में यह भी कहा गया कि देवी सरस्वती की मूर्ति को विदेश से वापस लाने को लेकर याचिकाकर्ताओं ने जो मांग की है, उस पर सरकार विचार कर सकती है।

गौरतलब है कि यह मामला लंबे समय से विवादित रहा है। हिंदू पक्ष इसे राजा भोज द्वारा निर्मित सरस्वती मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे सदियों पुरानी कमाल मौला मस्जिद बताता रहा है।

इससे पहले कोर्ट के आदेश पर ASI ने 2024 में इस स्थल का वैज्ञानिक सर्वे किया था। करीब 98 दिनों तक चले इस सर्वे के बाद 2000 पन्नों से अधिक की रिपोर्ट अदालत में पेश की गई थी। रिपोर्ट में संकेत दिया गया कि मौजूदा ढांचे से पहले यहां एक विशाल मंदिरनुमा संरचना मौजूद थी।

हालांकि मुस्लिम पक्ष ने ASI की रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण बताते हुए उसे चुनौती दी थी।

फिलहाल, 2003 की व्यवस्था के तहत यहां मंगलवार को हिंदू और शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय को प्रार्थना की अनुमति मिलती रही है। अब हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद आगे की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पर सबकी नजर रहेगी।

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